रिपोर्ट: हरीश कुमार,
जिला ब्यूरो (जालोर-भीनमाल, राजस्थान)भीनमाल (जालोर)।
राजस्थान की मरूधरा पर आस्था और जनसेवा के अनूठे केंद्र के रूप में उभर चुके जालोर जिले की भीनमाल तहसील के अंतर्गत आने वाले 52 वीर धाम लूणावास नगरी में इस बार एक ऐतिहासिक भव्य जागरण का आयोजन होने जा रहा है। परम पूज्य भोपा जी वागाराम जी के सानिध्य में आयोजित होने वाले इस धार्मिक उत्सव को लेकर क्षेत्र के लाखों श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। यह पावन धाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है, जहाँ देश-प्रदेश से लाखों लोग अपनी अटूट श्रद्धा लेकर आते हैं और वीर बापसी के आशीर्वाद से उनकी झोलियाँ खुशियों से भर जाती हैं। स्थानीय लोग और श्रद्धालु इस धाम की महिमा को देखकर इसे क्षेत्र का ‘दूसरा बागेश्वर धाम’ मान रहे हैं।संतानहीन दंपतियों को मिला सुख, 1000 से ज्यादा परिवारों की भरी झोली52 वीर धाम लूणावास अपनी दैवीय कृपा और मनोकामना पूर्ति के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। धाम के इतिहास और चमत्कारों की बात करें तो यहाँ ऐसे सैकड़ों उदाहरण मौजूद हैं, जहाँ शादी के 20-20 साल बीत जाने के बाद भी जिन दंपतियों के आँगन सूने थे, उन्होंने यहाँ आकर मन्नत माँगी और वीर बापसी की असीम अनुकंपा से उनके घर में बच्चों की किलकारियां गूंजीं। अब तक लगभग 1000 से अधिक ऐसे परिवारों की सूनी गोद इस दरबार से हरी हो चुकी है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।मंदी से जूझते व्यापार में आती है जोरदार बरकतकेवल पारिवारिक सुख ही नहीं, बल्कि आर्थिक तंगहाली और व्यापारिक समस्याओं से जूझ रहे लोग भी इस दरबार में बड़ी उम्मीद लेकर आते हैं। जिन लोगों का व्यवसाय पूरी तरह धीमा पड़ चुका था या घाटे में चल रहा था, उन्होंने जब लूणावास नगरी में आकर वीर बापसी के चरणों में अरदास लगाई, तो उनके बिजनेस में देखते ही देखते ज़ोरदार बरकत और तरक्की देखने को मिली। वर्तमान में 1000 से अधिक व्यापारी अपनी सफल व्यावसायिक यात्रा का श्रेय इसी पवित्र धाम को देते हैं।गौ सेवा का अनूठा संकल्प: 200 से अधिक बेसहारा गोवंश को मिला सहाराइस धार्मिक स्थल की सबसे खास और सराहनीय बात यह है कि यहाँ सिर्फ आध्यात्मिक साधना ही नहीं, बल्कि धरातल पर जीव सेवा भी की जा रही है। सड़कों पर घूमने वाले, किसानों की फसलों के कारण परेशान होने वाले और भूख के चलते अनजाने में प्लास्टिक खाकर असमय मृत्यु का शिकार होने वाले बेसहारा गोवंश के लिए यहाँ एक शानदार गौशाला का निर्माण किया गया है। वर्तमान में इस गोशाला में 200 से अधिक गायों को सुरक्षित रखा गया है, जिनके लिए प्रतिदिन आश्रम द्वारा विशेष रूप से हरा चारा मंगवाया जाता है। आस्था के साथ-साथ यह गोसेवा इस पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है।आगामी ऐतिहासिक जागरण को लेकर लूणावास नगरी में चारों तरफ भक्ति का माहौल है और व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।