राजन तिवारी के वार के बाद मिथिलेश तिवारी का पलटवार! 72 घंटे का कानूनी अल्टीमेटम
बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी पर राजन तिवारी के करारे वार के बाद अब मिथिलेश तिवारी ने भी प्रहार किया है।
मिथिलेश तिवारी की तरफ से राजन तिवारी और ‘स्वराज सच’ के मिंटू उपाध्याय को कानूनी नोटिस भेजा गया है।
बिहार की सियासत में बयानबाजी का तापमान बढ़ता जा रहा है। जिस जुबान से कल तक राजनीतिक आरोपों की बौछार हो रही थी, अब उसी विवाद ने कानून की चौखट पर दस्तक दे दी है।
22 सितंबर को पटना हाईकोर्ट के अधिवक्ता राधेश कुमार शर्मा की ओर से जारी इस नोटिस में 21 सितंबर को फेसबुक पर दिए गए राजन तिवारी के कथित बयानों को लेकर गंभीर आपत्ति जताई गई है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि राजन तिवारी ने शिक्षा विभाग को ‘लूट का अड्डा’ बताते हुए मिथिलेश तिवारी पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए।
इतना ही नहीं, नोटिस में तबादले से जुड़े मामलों में पैसे की मांग करने और मंत्री के बेटे की कथित भूमिका से जुड़े बयानों का भी उल्लेख है।
लेकिन विवाद की धार तब और तेज हो गई, जब नोटिस में राजन तिवारी के कथित उस बयान का जिक्र आया जिसमें मिथिलेश तिवारी की जातीय पहचान को लेकर ‘फर्जी ब्राह्मण’ जैसी टिप्पणी किए जाने का आरोप लगाया गया है। साथ ही कुचायकोट विधायक के परिवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे से जुड़े राजनीतिक आरोपों को भी नोटिस में चुनौती दी गई है।
यानी अब मामला सिर्फ राजनीति का नहीं रहा—बयान, आरोप और सबूत की लड़ाई कानून के दरवाजे तक पहुंच गई है।
मिथिलेश तिवारी की ओर से भेजे गए नोटिस में BNS की धारा 356, 196, 197 और 352 का उल्लेख किया गया है। नोटिस में आरोपों को निराधार बताते हुए कहा गया है कि भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी से जुड़े दावों के समर्थन में कोई प्रमाण नहीं दिया गया।
और अब इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा शब्द है—
72 घंटे!
नोटिस में राजन तिवारी और मिंटू उपाध्याय से बिना शर्त सार्वजनिक माफी, कथित मानहानिकारक पोस्ट और वीडियो हटाने तथा आगे ऐसे बयान नहीं देने की मांग की गई है।
नोटिस में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आपराधिक शिकायत और दीवानी कार्रवाई की जा सकती है।
अब असली सवाल यही है—
राजन तिवारी अपने आरोपों पर कायम रहेंगे?
क्या आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेज सामने आएगा?
या 72 घंटे के भीतर आएगा कोई ऐसा जवाब, जो बिहार की इस राजनीतिक लड़ाई की दिशा बदल देगा?
राजनीति में आरोप लगाना आसान है,
लेकिन आरोपों को साबित करना और सार्वजनिक मंच पर बोले गए शब्दों की कानूनी जिम्मेदारी उठाना—यही असली परीक्षा है।
राजन तिवारी के वार के बाद मिथिलेश तिवारी का कानूनी पलटवार सामने आ चुका है। अब नजर राजन तिवारी के अगले कदम पर है।
देसी अड्डा की नजर इस पूरे मामले पर है।
नोट: यह पोस्ट उपलब्ध कराए गए कानूनी नोटिस में दर्ज तथ्यों और मंत्री पक्ष के दावों पर आधारित है।
रिपोर्ट;अमरजीत सिंह