अकरम खान पटेल की रिपोर्ट
बैतूल।
मप्र पटवारी संघ, जिला ने राजस्व विभाग की नीतियों और योजनाओं की विसंगतियों को लेकर शासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिलाध्यक्ष मोहनलाल धुर्वे के नेतृत्व में पटवारियों ने कलेक्टर के नाम से प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी दो प्रमुख मांगों को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
*पदोन्नति में 50 वर्ष की आयु सीमा समाप्त की जाए*
पटवारी संघ ने पटवारी संवर्ग की पदोन्नति प्रक्रिया में लागू 50 वर्ष की आयु सीमा को गंभीर विसंगति करार दिया है। संघ का कहना है कि प्रदेशभर में बड़ी संख्या में पटवारी लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं और वर्तमान में पदोन्नति हेतु जानकारी भी संकलित की जा रही है। लेकिन 50 वर्ष की आयु सीमा के कारण कई वरिष्ठ और पात्र पटवारी पदोन्नति के लाभ से वंचित हो रहे हैं। संघ ने मांग की है कि अन्य शासकीय सेवकों की भांति पटवारियों को भी उनकी वरिष्ठता और सेवा अवधि के आधार पर सेवानिवृत्ति तक पदोन्नति का समान अवसर प्रदान किया जाए।
*स्वामित्व योजना 2026 निष्पादक के दायित्व से पृथक करने की मांग*
संघ ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना के अंतर्गत पटवारियों को सौंपे जा रहे निष्पादक के दायित्व पर भी सवाल उठाए हैं। अभिलेख विसंगति एवं कानूनी जवाबदेही भू-खण्ड के अधिकार अभिलेख या नाम में विसंगति होने पर पटवारी के समक्ष असमंजस की स्थिति बनती है। स्वामित्व, कब्जा और नाम से जुड़े विवादों के निराकरण की जवाबदेही सक्षम प्राधिकारी स्तर पर तय होनी चाहिए, ताकि भविष्य में न्यायालयीन या प्रशासनिक जवाबदेही पटवारी पर न आए। हितग्राही पहचान सत्यापन पर आपत्ति ग्राम आबादी में निवास करने वाले व्यक्तियों के व्यक्तिगत, पारिवारिक और निवास संबंधी सत्यापन का कार्य पटवारी के राजस्व कार्यक्षेत्र से सीधे संबंधित नहीं है। संघ का तर्क है कि यह दायित्व ग्राम पंचायत स्तर पर निर्धारित किया जाना अधिक व्यावहारिक होगा।