संवाददाता विकास कुमार शर्मा जोरहाट असम
असम की शान और भारत की स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने अपने 29वें जन्मदिन के मौके पर देशवासियों को स्वर्णिम सौगात दी है। जापान में आयोजित आइची-नागोया एशियन गेम्स के महिला 75 किलोग्राम भार वर्ग के खिताबी मुकाबले में लवलीना ने चीन की मुक्केबाज बाओ जियी (Bao Ziyi) को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
दिग्गज एमसी मैरी कॉम (2014) के बाद एशियन गेम्स में मुक्केबाजी का गोल्ड जीतने वाली लवलीना दूसरी भारतीय महिला मुक्केबाज बन गई हैं। इसके साथ ही वे लगातार दो एशियन गेम्स के फाइनल में पहुंचने वाली देश की पहली महिला मुक्केबाज भी बनीं।
रिंग में दिखा जबरदस्त संयम और रणनीति
खिताबी मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। लवलीना ने पहले राउंड में 3-2 की बढ़त बनाई। दूसरे राउंड में चीनी खिलाड़ी के आक्रामक रुख के बावजूद लवलीना ने अपना आपा नहीं खोया और 4-1 से राउंड अपने नाम किया। तीसरे और निर्णायक राउंड में भी उन्होंने अपनी सधी हुई रणनीति बनाए रखी और 5-0 से एकतरफा जीत दर्ज की। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने कजाकिस्तान की विश्व चैंपियन नताल्या बोगदानोवा को 3-2 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया था।
जन्मस्थान बरपतार में जश्न का माहौल
लवलीना के गृहक्षेत्र असम के बरपतार में सुबह से ही मैच को लेकर भारी उत्साह था। स्थानीय खेल प्रेमियों व सामाजिक संगठनों ने एकजुट होकर टीवी पर मुकाबला देखा। जैसे ही लवलीना की जीत की घोषणा हुई, पूरा क्षेत्र आतिशबाजी और जश्न में डूब गया।
भारतीय मुक्केबाजी के लिए यादगार अभियान
हांगझोऊ एशियन गेम्स के 4 padaks की तुलना में इस बार भारतीय मुक्केबाजों ने अपना प्रदर्शन बेहतर करते हुए कुल 6 पदक पक्के किए हैं। लवलीना के अलावा परवीन हुड्डा (65 किग्रा) और अंकुश पंघाल (80 किग्रा) भी अपने-अपने भार वर्ग के स्वर्ण पदक मुकाबलों में रिंग में उतरेंगे