सम्मेदशिखरजी में 2027 चातुर्मास की मंगल भावना लेकर पहुंचे श्रद्धालु
आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के समक्ष श्रीफल भेंटकर की चातुर्मास की विनती, संत निवास निर्माण और छतरी लोकार्पण की भी रखी भावना
नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर। इंद्रध्वज महामंडल विधान के पावन अवसर पर सम्मेदशिखरजी स्थित बीसपंथी कोठी के श्रद्धालु आचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज के चरणों में पहुंचे। श्रद्धालुओं ने वर्ष 2027 का चातुर्मास सम्मेदशिखरजी में करने की मंगल भावना व्यक्त करते हुए गुरुदेव को श्रीफल भेंट किया और आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं ने बताया कि वात्सल्य रत्नाकर आचार्य श्री विमलसागर जी महाराज की छतरी के समीप तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज की छतरी का निर्माण गुरुदेव के आशीर्वाद से पूर्ण हो चुका है। उन्होंने इसका भव्य लोकार्पण आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के करकमलों से एवं पावन सान्निध्य में कराने की भावना व्यक्त की। साथ ही गुरुदेव के मुखारविंद से गुरु मंत्र प्राप्त करने की अभिलाषा भी जताई।
श्रद्धालुओं ने तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मतिसागर जी महाराज के नाम से भव्य संत निवास बनाने तथा उसमें आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज का वर्ष 2027 का चातुर्मास संपन्न कराने की मंगल भावना भी रखी। श्रद्धालुओं की इस पहल का उद्देश्य सम्मेदशिखरजी की पावन धरा पर धर्मप्रभावना को विस्तार देना है।
स्वयं की कमियों को पहचानना ही आत्मसुधार का मार्ग : आचार्य श्री
अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने आत्मनिरीक्षण का संदेश देते हुए कहा कि व्यक्ति दूसरों की कमियां निकालने में अपनी उम्र गुजार देता है। यदि वह दूसरों के दोष देखने के बजाय स्वयं को तराशने में जुटता, तो आज उसका व्यक्तित्व और भी निखर जाता।
गुरुदेव ने कहा कि दूसरों की गलतियां निकालने से कितनी तरक्की होती है, यह कहना कठिन है, लेकिन जो व्यक्ति प्रतिदिन अपनी गलतियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करता है, वह आत्मकल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ता है। जीवन में वास्तविक परिवर्तन दूसरों को बदलने से नहीं, बल्कि स्वयं को सुधारने से आता है।
आचार्य श्री ने इंद्रध्वज महामंडल विधान के भक्तिमय वातावरण का उल्लेख करते हुए कहा कि जब इस विधान में इतना आनंद और भक्ति देखने को मिल रही है, तो पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का वातावरण कितना आनंदमय होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। उनके इस संदेश से श्रद्धालुओं में आगामी धार्मिक आयोजनों के प्रति उत्साह और भक्ति का भाव और प्रगाढ़ हुआ।
आचार्य श्री के पावन सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने धर्म, साधना और जिनशासन की प्रभावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।