लोकेशन/ अजयगढ़
रिपोर्टर: सुरेश कुमार यादव
ब्रेकिंग न्यूज़ | अजयगढ़ पन्ना, मध्यप्रदेश
अजयगढ़, जिला पन्ना। उत्तर वन मंडल के अजयगढ़ रेंज अंतर्गत ग्राम पेराहा में रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को वन भूमि से कथित अवैध कब्जा हटाने पहुंची वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम के सामने ग्रामीणों ने विरोध जताया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर लाठी-डंडों से मारपीट हुई। घटना में महिलाओं सहित कई ग्रामीण घायल हुए, वहीं दो वनकर्मियों के भी घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायलों को उपचार के लिए अजयगढ़ तथा जिला अस्पताल पन्ना रेफर किए जाने की सूचना है।
30 हेक्टेयर वन भूमि को लेकर विवाद
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पेराहा में लगभग 30 हेक्टेयर वन भूमि पर पटेल समाज के कुछ लोगों द्वारा लंबे समय से खेती किए जाने की बात सामने आई है। वन भूमि से कब्जा हटाने के लिए छतरपुर और पन्ना क्षेत्र के वन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ पुलिस बल मौके पर पहुंचा था। कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों ने विरोध किया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई और विवाद हिंसक झड़प में बदल गया।
महिलाओं सहित कई ग्रामीण घायल होने का दावा
घायल ग्रामीण विनोद पटेल के अनुसार, कार्रवाई के दौरान विरोध करने पर ग्रामीणों और महिलाओं के साथ मारपीट की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई पूर्व सूचना या नोटिस नहीं दिया गया था। इस घटना में सोना पटेल (22), विनोद पटेल (32), दिनेश पटेल (30), राधा पटेल (20) और रजनीश पटेल (22) के घायल होने की जानकारी दी गई है।
ग्रामीणों का दावा है कि घटना में 20 से 25 लोग घायल हुए हैं। हालांकि, घायलों की वास्तविक संख्या और चोटों की गंभीरता की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
दो वनकर्मियों के घायल होने की भी सूचना
दूसरी ओर, ग्रामीणों के हमले में देवेंद्रनगर के वन रक्षक बसंत लाला वर्मा और दक्षिण वन मंडल पवई रेंज की वनपाल भारती कुमारी के घायल होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस एवं प्रशासन द्वारा स्थिति को नियंत्रित करने और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच किए जाने की सूचना है। दोनों पक्षों के बयान के आधार पर पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया भी जारी बताई जा रही है।
अक्टूबर में पौधरोपण को लेकर उठे सवाल
इस पूरे मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल अक्टूबर माह में कराए जा रहे पौधरोपण को लेकर भी उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर सवाल किया जा रहा है कि यदि वन भूमि पर पौधरोपण कराया जा रहा है, तो पौधों को शुरुआती गर्मी और पानी की कमी से बचाने के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
आमतौर पर मध्य प्रदेश में वर्षा ऋतु के दौरान पौधरोपण किया जाता है, ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी उपलब्ध रहे। ऐसे में अक्टूबर में लगाए जा रहे पौधों की सिंचाई, सुरक्षा और जीवित रहने की दर सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने क्या कार्ययोजना बनाई है? पौधरोपण पर खर्च होने वाली सरकारी राशि और पौधों के संरक्षण की व्यवस्था का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
10 से 15 वर्ष के बच्चों से काम कराने का आरोप
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि आसपास के ग्रामों के लगभग 10 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों से पौधरोपण का कार्य कराया गया। यदि यह आरोप सही पाया जाता है, तो यह गंभीर जांच का विषय है कि क्या बच्चों से उनकी उम्र के अनुरूप सुरक्षित कार्य कराया गया था या उनसे मजदूरी कराई गई।
नाबालिग बच्चों से काम कराने के संबंध में लागू बाल एवं किशोर श्रम कानूनों, कार्य की प्रकृति और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों की जांच आवश्यक है। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बच्चों से काम कराए जाने के आरोपों पर संबंधित विभाग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से सवाल
1. लगभग 30 हेक्टेयर वन भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई किस आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई?
2. क्या संबंधित कब्जाधारियों को नियमानुसार नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था?
3. अक्टूबर में पौधरोपण कराने का निर्णय किस कार्ययोजना के तहत लिया गया?
4. लगाए गए पौधों को जीवित रखने के लिए सिंचाई एवं रखरखाव की क्या व्यवस्था है?
5. क्या 10 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों से पौधरोपण का कार्य कराया गया? यदि हां, तो किसकी अनुमति से?
6. झड़प में घायल ग्रामीणों, महिलाओं और वनकर्मियों के मामले में निष्पक्ष जांच कब होगी?
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
ग्राम पेराहा की घटना ने वन भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई, ग्रामीणों की सुरक्षा और पौधरोपण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को चाहिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोनों पक्षों के आरोपों की पुष्टि की जाए, घायलों को उचित उपचार उपलब्ध कराया जाए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
नोट: इस समाचार में ग्रामीणों के आरोपों और प्राप्त जानकारी को शामिल किया गया है। घटना, घायलों की संख्या, कार्रवाई की वैधानिक प्रक्रिया तथावो नाबालिग बच्चों से काम कराने के आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि किया जाना आवश्यक है।










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