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जन्मतिथि में गड़बड़ी पर कासमिया इंटर कॉलेज को कानूनी नोटिस, छात्र ने मांगा ₹5 लाख हर्जाना

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नजीबाबाद (बिजनौर)।

हाईस्कूल के शैक्षणिक अभिलेखों में जन्मतिथि गलत दर्ज होने और कथित तौर पर कई वर्षों तक सुधार न किए जाने का मामला सामने आया है। साहनपुर निवासी मोहम्मद फरहान की ओर से कासमिया इंटर कॉलेज, नजीबाबाद के प्रधानाचार्य को कानूनी नोटिस भेजकर जन्मतिथि में संशोधन, संशोधित प्रमाणपत्र जारी कराने और ₹5 लाख के हर्जाने की मांग की गई है। यह नोटिस दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता जैद खान एवं इरफान हुसैन की ओर से भेजा गया है।

क्या है पूरा मामला?

नोटिस के अनुसार, मोहम्मद फरहान पुत्र मोहम्मद इस्लाम, निवासी मोहल्ला किला, साहनपुर ने वर्ष 2019 में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल परीक्षा अनुक्रमांक 0688933 से दी थी। नोटिस में छात्र की वास्तविक जन्मतिथि 1 जून 2002 बताई गई है, जबकि हाईस्कूल के शैक्षणिक अभिलेखों में जन्मतिथि 1 जून 2006 दर्ज होने का उल्लेख किया गया है।

छात्र पक्ष का दावा है कि जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और अन्य सरकारी अभिलेखों में सही जन्मतिथि 1 जून 2002 दर्ज है। आरोप है कि विद्यालय के अभिलेखों में हुई त्रुटि के कारण गलत जन्मतिथि बोर्ड को भेजी गई, जिससे हाईस्कूल की मार्कशीट एवं प्रमाणपत्र में भी गलत विवरण दर्ज हो गया।

कई वर्षों से सुधार लंबित होने का आरोप

कानूनी नोटिस में कहा गया है कि जन्मतिथि में संशोधन के लिए छात्र की ओर से कई बार अभ्यावेदन दिए गए। जन्म प्रमाणपत्र, एलकेजी प्रवेश संबंधी अभिलेख, स्थानांतरण प्रमाणपत्र, प्रवेश रजिस्टर और अन्य दस्तावेज भी प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है। नोटिस के अनुसार, विद्यालय की ओर से संबंधित दस्तावेज सत्यापन के लिए क्षेत्रीय कार्यालय, बरेली भेजे गए, लेकिन कई वर्षों बाद भी मामले का अंतिम समाधान नहीं हुआ।

छात्र पक्ष का कहना है कि जन्मतिथि में त्रुटि के कारण उसे पासपोर्ट, सरकारी दस्तावेजों, उच्च शिक्षा और रोजगार संबंधी अवसरों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी आधार पर विद्यालय प्रशासन की कथित लापरवाही और लंबे समय तक सुधार न किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

₹5 लाख मुआवजे सहित छह मांगें

अधिवक्ताओं द्वारा भेजे गए नोटिस में प्रधानाचार्य से प्रमुख रूप से निम्न मांगें की गई हैं—

1. विद्यालय एवं संबंधित बोर्ड अभिलेखों में जन्मतिथि 1 जून 2006 के स्थान पर 1 जून 2002 दर्ज कराने की कार्रवाई की जाए।

2. नियमानुसार संशोधित हाईस्कूल मार्कशीट और प्रमाणपत्र जारी कराया जाए।

3. आवश्यक अभिलेख एवं संस्तुतियां सक्षम प्राधिकारी को भेजी जाएं।

4. कथित लापरवाही के संबंध में लिखित खेद व्यक्त किया जाए।

5. मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान, करियर संबंधी अवसरों की कथित हानि और अन्य परिणामी क्षति के लिए ₹5 लाख का मुआवजा दिया जाए।

6. जन्मतिथि में सुधार कराने के लिए किए गए उचित एवं प्रमाणित खर्चों की प्रतिपूर्ति की जाए।

15 दिन में जवाब और कार्रवाई की मांग

नोटिस में प्राप्ति की तारीख से 15 दिनों के भीतर मांगों का अनुपालन करने को कहा गया है। ऐसा नहीं होने पर छात्र की ओर से सक्षम न्यायालय में उपयुक्त दीवानी वाद, रिट याचिका अथवा अन्य उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने की चेतावनी दी गई है।

फिलहाल, उपलब्ध नोटिस के आधार पर यह छात्र पक्ष के आरोपों और मांगों का मामला है। विद्यालय प्रशासन का पक्ष तथा संबंधित बोर्ड का अंतिम निर्णय सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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