दंतेवाड़ा। आत्मसमर्पण के बाद जीवन को नई दिशा देते हुए पंडरू ने हुनर को अपनी आजीविका का साधन बनाया है। बीजापुर गांव के निवासी पंडरू ने भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (SBI RSETI), दंतेवाड़ा से बांस शिल्पकला का प्रशिक्षण प्राप्त कर अब बांस से विभिन्न प्रकार की उपयोगी वस्तुएं बनाकर बेचने का काम शुरू किया है। अपने हुनर के दम पर वह आजीविका अर्जित कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रहा है।
पंडरू ने SBI RSETI दंतेवाड़ा में 22 नवंबर 2025 से 5 दिसंबर 2025 तक बांस शिल्पकला का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस दौरान उसने बांस से उपयोगी सामग्री और हस्तशिल्प की वस्तुएं बनाने का हुनर सीखा। प्रशिक्षण के बाद उसने इस कला को अपने रोजगार से जोड़ते हुए बांस से सामान बनाकर बिक्री करना शुरू किया।
बस्तर क्षेत्र में बांस शिल्पकला पारंपरिक कला के साथ-साथ स्वरोजगार का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इस कला के जरिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर उपयोगी वस्तुएं तैयार की जा सकती हैं। पंडरू ने प्रशिक्षण से प्राप्त कौशल को काम में लाकर अपनी आजीविका कमाने का रास्ता अपनाया है।
SBI RSETI दंतेवाड़ा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। पंडरू की यह यात्रा कौशल विकास और आजीविका के महत्व को दर्शाती है। आत्मसमर्पण के बाद हुनर सीखकर अपने पैरों पर खड़े होने का उसका प्रयास समाज की मुख्यधारा से जुड़ने और सम्मानपूर्वक जीवन जीने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
हुनर बना आजीविका का सहारा
पंडरू अब बांस से सामान बनाकर बेच रहा है और अपने कौशल के माध्यम से कमाई कर रहा है। उसकी यह कहानी बताती है कि सही प्रशिक्षण, मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से व्यक्ति अपने जीवन में बदलाव ला सकता है। बांस शिल्पकला के माध्यम से स्वरोजगार अपनाना न केवल उसके लिए आजीविका का साधन बना है, बल्कि अन्य लोगों को भी कौशल सीखकर आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दे सकता है।
SBI RSETI दंतेवाड़ा से प्रशिक्षण प्राप्त कर पंडरू द्वारा स्वरोजगार की राह अपनाना कौशल विकास और पुनर्वास के महत्व को रेखांकित करता है। यह पहल बस्तर क्षेत्र में आजीविका के नए अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
