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रिकॉर्ड में वीरान गांव को आबादी घोषित करने की मांग: करंजिया जनपद के कुटेली दादर के ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए कर रहे
करंजिया जनपद की उमरिया पंचायत के पोषक ग्राम कुटेली दादर के ग्रामीण अपने गांव को आबादी घोषित करवाने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। दरअसल, 2004 से लेकर अब तक गांव राजस्व रिकार्ड में आबादी विहीन दर्शाया जा रहा है। जिसके चलते ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं का लाभ मिलने में समस्या आ रही है।
2004 में राज्य शासन ने किया आबादी विहीन गांव घोषित
भू-अभिलेख कार्यालय के अधीक्षक गिरीश धुलेकर ने रिकार्ड देखकर बताया कि 2004 की जनगणना के दौरान 16 अप्रैल 2004 को राज्य शासन ने अधिसूचना जारी कर करंजिया जनपद पंचायत क्षेत्र के कुटेली दादर गांव को आबादी विहीन गांव घोषित कर दिया था लेकिन आज तक यह पता नहीं चल सका कि आखिर ये हुआ कैसे? ग्रामीणों ने आवेदन आवेदन दिया है। इसको लेकर भू-अभिलेख विभाग ने 18 अप्रैल 2022 को संशोधित अधिसूचना जारी करने के लिए राज्य शासन को पत्र भेजा है। ताकि गांव को आबादी वाला घोषित किया जा सके।
500 की आबादी वाला गांव है कुटेली दादर
उमरिया ग्राम पंचायत के पोषक ग्राम कुटेली दादर के ग्रामीण चंद्र भान धुर्वे, बुधराम सिंह पंद्राम यादव सिंह सैयाम ने बताया कि हमारा परिवार वर्षों से गांव में रह रहा है। खेती करके जीवन यापन कर रहे हैं।अचानक 2004 में पता नहीं कैसे शासन ने गांव को आबादी विहीन गांव घोषित कर दिया। तब से लेकर आज तक हम लोग अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगा रहे हैं, ताकि गांव आबादी वाला गांव घोषित हो सके।
योजनाएं नहीं चाहिए केवल सड़क बना दो
ग्रामीण संयंद्र सिंह धुर्वे बताते है कि कुटेली दादर से मुख्य मार्ग तक की दूरी लगभग पांच किलोमीटर तक कच्चा रास्ता है। बारिश के समय पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। गांव तक एंबुलेंस नहीं आ पाती है।गर्भवती महिलाएं और बीमार व्यक्ति को तीन किलोमीटर तक खाट में लिटा कर पैदल ले जाना पड़ता है। हम लोग चाहते हैं कि शासन हमें राशन न दें और योजनाओं का लाभ भी बंद कर दे।