यह लेख राजेश राणा नामक एक रक्तदाता की कहानी बताता है, जिन्होंने 41 बार रक्तदान किया है और कई लोगों की जान बचाई है। वह केन्दुझर खबर फाउंडेशन के मेरुदंड हैं और रक्तबीर के रूप में जाने जाते हैं। लेख में उनकी महान मानवता और सेवा की प्रशंसा की गई है।
रक्तदाता राजेश राणा की जीवन कहानी मिली खबर के अनुसार, रक्तदाता राजेश राणा की जीवन कहानी का वर्णन किया गया है। एक बार नहीं, दो बार नहीं, पांच बार नहीं, दस बार नहीं। आज 41 बार उन्होंने रक्तदान किया है और किसी की जान बचाई है। सेलून में दाढ़ी कटवाते समय अगर सेलून भाई भूल से कोई जागह पर ब्लेड बजा दें तो हम उनके चौदह पुरुषों की पिंड उधार करते हैं। हम कहते हैं शीघ्र फिटकरी/बोरप्लस लगा। हालांकि यह भाईजी 41 बार अपने शरीर से रक्त झराकर अर्थात दान कर के अन्य लोगों को उपकृत कर चुके हैं। प्रति बार 350 एमएल रक्त उनके शरीर से निकाला जाता है और लोग उपकृत होते हैं। सोचते हैं राजेश 41 गुण 350 एमएल कितना रक्त दे चुके हैं अब तक! यह महानुभाव जी हैं केन्दुझर खबर फाउंडेशन के मेरुदंड, अभिन्न अंग रक्तबीर राजेश कुमार राणा भाई। आज केन्दुझर खबर फाउंडेशन के लिए बी गर्व की बात है। केन्दुझर सेवा फाउंडेशन के लिए बी गौरव। एक बार नहीं दस बार नहीं 41 बार रक्तदान। इसके अलावा 1500 से अधिक रोगियों के लिए रक्त योगाड करके उन्हें देने का विरल मानवीय कार्यक्रम किया। फोटो में हैं भरोसा परिवार के लंबोदर महंत भाई। मो परम आत्मीय मो परम बंधु बड़े भाई। भरोसा परिवार के वास्तविक भरोसा और राज्य सभापति भी है। लंबोदर भाई जैसा भाई साथी हो तो आप जीवन के सभी युद्ध आसानी से जीत जाएंगे। लंबोदर भाई बी केन्दुझर खबर परिवार के अभिन्न अंग हैं। राजेश भाई जी एक वास्तविक केन्दुझरिया हैं। केन्दुझर प्रति उनकी सेवा इतिहास के स्वर्णाक्षर में लिखा रहेगा । केन्दुझर खवर संपादक देवीशंकर दास अपने बयान पर एहि काहानी उल्लेख किया है ।
संवाददाता: ब्यूरो चीफ पुरुषोत्तम पात्र, केन्दुझर (ओडिशा)