थानाध्यक्ष ने आईजीआरएस में थाने की रैंकिंग बढ़ाने के लिए कूटरचित ढंग से किया फर्जीवाड़ा
आईजीआरएस की रैंकिंग में नंबर वन आने की होड़ में थानाध्यक्ष ने खुद के मोबाइल का प्रयोग कर किया फर्जी शिकायत और कागजों पर हुआ निस्तारण कर, रिपोर्ट ष्रेषित
कूटरचित पर विश्वास करने वाले थानाध्यक्ष के न्याय पर जनता कैसे करें भरोसा
सपा में आस्था रखने वाले थानाध्यक्ष भाजपा सरकार को कर रहे बदनाम
पूर्व सपा सांसद के नजदीकी बताए जाते हैं राजगढ़ थानाध्यक्ष महेन्द्र पटेल
मंडल ब्यूरो चीफ चंद्रजीत सिंह की रिपोर्ट
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश सरकार जहां अपना स्वच्छ छवि और कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखना चाहती है वही अनुभवहीन थानाध्यक्ष ने खुद के पर्सनल मोबाइल का प्रयोग करते हुए कूटरचित अभिलेख तैयार कर माननीय मुख्यमंत्री एवं डीजीपी महोदय उत्तर प्रदेश की संचालित महत्वाकांक्षी योजना आईजीआरएस प्रणाली पर विश्वास घात करने वाले थानाध्यक्ष राजगढ़ महेंद्र पटेल ने फर्जी नाम से धमकी देने की तीन आईजीआरएस के अंतर्गत शिकायत दर्ज कराई जिससे कि निस्तारण में थाने की रैंकिंग नंबर वन हो जाए और थाने का नाम गुडवर्क की श्रेणी में आ जाए का मामला प्रकाश में आया है। सपा सरकार में आस्था रखने वाले थानाध्यक्ष भाजपा सरकार को बदनाम करने पर तुले हैं। बताया गया कि मिर्जापुर जनपद के राजगढ़ थानाध्यक्ष महेन्द्र पटेल का नाम इन दिनों विभिन्न मामले को लेकर काफी सुर्ख़ियों में चल रहा है। अभी तत्काल का आईजीआरएस के तीन कूटरचित ढंग के मामले को लेकर पूरे जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है। जहां थानाध्यक्ष के फर्जी गुडवर्क में पुलिस विभाग की किरकिरी हो रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार आईजीआरएस संख्या 40019925013219 तथा दूसरा 40019925013220 एवं तीसरा 40019925013221 तीनों को अपने निजी नंबर से थानाध्यक्ष ने फर्जी शिकायतकर्ता क्रमशः राजू, राजेश एवं राकेश निवासी ग्राम कुड़ी थानाक्षेत्र राजगढ़ में धमकी देने से संबंधित विषयक में स्वत: शिकायत दर्ज किया। मजे की बात तो यह है कि मामले के निस्तारण में इसे 26 मई 2025 के तिथि में थानाध्यक्ष के दबाव में नौकरी करने वाले एक उपनिरीक्षक का भी हस्ताक्षर किया गया है, हो सकता है यह भी हस्ताक्षर फर्जी हो। तीनों आईजीआरएस में शिकायतकर्ता की तरफ से रिपोर्ट लगाया गया कि आवेदक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहता। इतना ही नहीं यह जानकर आप और आश्चर्यचकित हो जाएंगे कि जिस विपक्षी का नाम क्रमशः राकेश कुमार पुत्र अजय तथा रमेश कुमार पुत्र संगम एवं राजू पुत्र रमेश निवासीगण ग्राम कुड़ी, थाना क्षेत्र राजगढ़, दर्शाया गया है इन तीनों नाम के व्यक्ति कुड़ी गांव के निवासी नहीं है इसकी पुष्टि ग्राम प्रधान गुलाब मौर्य ने किया है। यानी कि शिकायतकर्ता आवेदक का नाम व पता फर्जी जिसमें स्वयं थानाध्यक्ष का मोबाइल नंबर और विपक्षी का भी नाम वह पता फर्जी दर्शाया गया। अब बात आती है गांव में गवाह का जिसका नाम और मोबाइल नंबर का प्रयोग किया गया तो वह भी फर्जी है। जिसमें अन्य जनपदों के नंबर और नाम दर्शाये गए हैं। कुछेक का नाम व नंबर कुड़ी गांव का मिला तो उसे पर बात करने पर जवाब आया कि हम उक्त नाम तथा पक्ष – विपक्ष को नहीं जानतेऔर ना ही कोई इस प्रकार का मामला मेरे संज्ञान में है। निस्तारण जांच रिपोर्ट पर बाकायदा अक्षांश 24. 863711 और देशांतर 82. 840996 भी अंकित कर थानाध्यक्ष ने सीधे विभाग को ही मूर्ख बनाया जा सके और फर्जी कार्रवाई को कूटरचित ढंग से फर्जी कार्रवाई को सत्य सावित किया जा सके और आईजीआरएस में थाने की रैंकिंग सर्वोच्च हो जाए। गौर करने की एक बात और है कि आईजीआरएस का मामला निस्तारण का रिपोर्ट लगते ही हेड क्वार्टर से शिकायतकर्ता पर फोन आता है कि आप कार्रवाई से संतुष्ट हैं या नहीं तो तीनों आईजीआरएस में थाना प्रभारी महेन्द्र पटेल ने पहले से ही आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज करने के समय ही अपना नम्बर दर्ज किया गया था, तो थानाध्यक्ष ने फोन आने पर कार्रवाई से संतुष्ट होने का जवाब दिए। मामले को इतनी सावधानी से मूर्त रूप दिया गया कि स्वयं शिकायत करना और स्वयं हल करना हुआ कि थाने की रैंकिंग बढ़ जाए। लोगों ने संदेह जताया कि यदि जांच उच्च स्तरीय टीम गठित कर किया जाए तो इस तरह के और फर्जीवाड़ा मामला सामने आएगा। आजकल की चर्चाएं थानाध्यक्ष के कार्य को लेकर खूब चल रही है कि जब से यह थाना अध्यक्ष आए हैं तब से नशाखोरी और गौ तस्करी तथा खनन कार्य में काफी इजाफा हुआ है। थानाध्यक्ष काफी मजबूत पकड़ वाले बताए जाते हैं इसलिए इनकी जांच भी किसी मामले में कोई नहीं कर सकता। बताया तो यहां तक जाता है कि अनुभवी और योग्य दरोगा रहते हुए टू स्टार अनुभवहीन को इतने बड़े थाने की जिम्मेदारी दे दी गई। लोगों में चर्चा बड़ी जोरों पर है कि जब न्याय करने वाले ही खुद फरियादी बनकर गलत कागज तैयार कर वाहवाही लूटने में लगे रहेंगे तो आम जनता न्याय पर किस प्रकार भरोसा करे। अब देखना है कि इस बड़े संगीन मामले को जो सरकार और विभाग की छवि नष्ट करने में लगे हैं उनके खिलाफ विभाग क्या एक्शन लेता है।