उरई(जालौन):
प्रो.रविकांत चन्दन (लखनऊ विश्वविद्यालय) पर दर्ज झूठे मुकदमें से नाराज कोरी समाज ने दिया ज्ञापन:
आज समस्त बहुजन संगठनों, कोरी समाज जनपद जालौन, रैपिड एक्शन टीम, और श्रीशायकवार कोरी जनकल्याण परिषद के संयुक्त तत्वाधान में समाज के द्वारा संयुक्त रुप से महामहिम राष्ट्रपति महोदया को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारी जालौन के माध्यम से भेजकर लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रविकांत चन्दन ( मूल निवासी जनपद जालौन ) पर जिला छतरपुर,थाना बमीठा,मध्य प्रदेश, में बागेश्वर धाम जन समिति के धीरेंद्र कुमार गौर की शिकायत पर धारा 353(2) बीएनएस के तहत कराई गई एफ आई आर रद्द करने व बागेश्वर धाम समिति की एंबुलेंस से संदिग्ध हालत में महिलाओं को जबरन मारते पीटते व अभद्रता करते हुए ले जाया जा रहा था उसकी न्यायिक जांच की मांग करते हैं और साथ ही प्रदेश में तथाकथित बाबाओ द्वारा अपनी गद्दी बैठाने के लिए आश्रम बनाते हैं और आश्रम बनाने के नाम पर गांव समाज की जमीनों और गौचरा/चारागाह, भीट पर बसे गरीबों आदिवासियों को बेरहमी और अन्यायपूर्ण तरीके से हटाकर जमीनों पर कब्जा करते हैं। तथाकथित बाबाओ द्वारा अवैध कब्जों पर चलाए जा रहे आश्रमों की भी शासन द्वारा जांच की जाए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा 1948″ नागरिक एवं राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धता 1966″और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन 1979 एवं भारत के संविधान में अनुच्छेद 51A(H) सभी नागरिकों से वैज्ञानिक स्वभाव, मानवतावाद, और जांच -पड़ताल की भावना विकसित करने की अपेक्षा करता है कुछ राज्य सरकारों ने वैज्ञानिक सोच बढ़ाने की वजह से अपने -अपने राज्यों में कानून पारित किए गए इसी प्रकार बिहार में “द प्रिवेंशन ऑफ विच (डायन) प्रैक्टिस एक्ट 1999 जिसको महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन कानून कहा गया एवं कर्नाटक में ” काला जादू रोकथाम एवं उन्मूलन अधिनियम 2017 के रुप पारित हुआ एवं लोकसभा में “prevention of witch hunting Bill 2016” डायन शिकार निवारण विधेयक लाया गया लेकिन पारित नहीं हो पाया परन्तु वर्तमान में ये कानून आज भी प्रभावी हैं – ड्रग एंड मैजिक रेमेडीज़ एक्ट 1954 के तहत अंध प्रावधानों का भी उद्देश्य भी भारत में प्रचलित विभिन्न अंधविश्वासी गतिविधियों में कमी लाना है । महामहिम राष्ट्रपति को भेजे गये ज्ञापन में प्रो.डॉ रविकांत चन्दन लखनऊ विश्वविद्यालय के ऊपर बागेश्वर धाम द्वारा झूठे मुकदमा वापस लेने, देशव्यापी ड्रग्स एण्ड मैजिक रेमेडीज़ एक्ट 1954 लागू करने,लोकसभा में डायन शिकार निवारण विधेयक पारित कराने एवं उत्तर प्रदेश विधानसभा में अंध विश्वास विरोधी कानून पास कराये जाने की मांग की गई । ज्ञापन देने वालों में विनोद वर्मा ऐर संस्थापक अध्यक्ष कोरी चबूतरा विकाश ट्रस्ट, एड0 सूरज प्रसाद,बालक राम वर्मा,एड0 संजीव कुमार, एड0 अनम वर्मा एड0 महेंद्र पाल सिंह, देवेंद्र वर्मा, अनिल सिन्दूर परमलाल मास्टर साहब, सुरेश शाक्य, प्रवीण वर्मा, हरिश्चन्द्र वर्मा, संतोष वर्मा, नाथूराम बौद्ध, देवेंद्र जाटव, अरविन्द खाबरी, रामप्रकाश गौतम, दिनेश वर्मा हृदेश वर्मा, रमेश चंद्र वर्मा आर पी रामसखा,संत कुमार शिरोमणि,चंद्रभूषण शाक्य टी डी शाक्य, लाखन बैरागी दीनदयाल शाक्य मंशाराम शाक्य, नेतराम, मोतीलाल वर्मा, मखंचू,शिवनंदन, सौरभ वर्मा अजय वर्मा राजू वर्मा परशुराम शाक्य संजय रामकुमार फ़ौजी राधाकृष्ण वर्मा,हरिश्चन्द्र वर्मा, धर्मेंद्र वर्मा, डॉ धर्मेंद्र वर्मा जीतेन्द्र वर्मा,हरी बाबू,प्रभु दयाल राधेलाल कोंच पुष्पेंद्र वर्मा कोंच कैलाश चंद्र वर्मा कोंच, शीलू कोंच माताप्रसाद कोंच शांति प्रकाश, कौशल किशोर वर्मा तेजप्रताप सिंह चंद्रभान वर्मा, नारायणदास, चतुर्भुज, रोहित वर्मा, निखिल वर्मा मनीष कुमार वर्मा प्रभु दयाल, अनुज प्रशांत, अखिलेश कुमार, ब्रजेश कुमार रामबहादुर, कँकनखेरा,बुद्ध सिंह आदि शामिल रहें।
(अनिल कुमार ओझा ब्यूरो प्रमुख
उरई-जालौन) उत्तर प्रदेश