नरेश सोनी
इंडियन टीवी न्यूज
हजारीबाग
पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता के संघर्ष का नतीजा है झारखंड की विस्थापन नीति: खतियानी परिवार
हजारीबाग: झारखंड सरकार के मंत्रिमंडल द्वारा विस्थापन नीति को मंजूरी देना पूर्व सांसद और खतियानी परिवार के अभिभावक, भुवनेश्वर प्रसाद मेहता के दशकों लंबे संघर्ष का परिणाम है। खतियानी परिवार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह दावा किया है कि इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे मेहता जी का जोरदार आंदोलन रहा, जिसने पूरे झारखंड में एक नई हलचल पैदा कर दी थी।
भुवनेश्वर प्रसाद मेहता का जन्म ही एक आंदोलनकारी के रूप में हुआ था। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों के साथ-साथ गरीबों और मजदूरों के हितों के लिए समर्पित कर दिया। वर्ष 1967 से ही उन्होंने लगातार भू-माफियाओं के खिलाफ संघर्ष किया, जिसकी शुरुआत बड़कागांव और केरेडारी के जमींदारों के खिलाफ आंदोलन से हुई। इस दौरान उन्हें 36 बार जेल जाना पड़ा और जमींदारों ने उनकी जान लेने की भी साजिश रची थी।
अपने दौर में हजारीबाग के ‘शेर’ के रूप में मशहूर रहे मेहता जी ने अपने संघर्ष और लोकप्रियता के दम पर भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता यादुनाथ पांडे और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा को भी चुनावी रण में पराजित किया था। आज भी संसदीय क्षेत्र में विस्थापन और नियोजन नीति को लेकर उनका संघर्ष जारी है।
खतियानी परिवार के संस्थापक स्वर्गीय ए.डी. नंदी भी मेहता जी के आंदोलन से बहुत प्रभावित थे और उनके संघर्षों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। आज, मोहम्मद हकीम खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव के रूप में उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
विज्ञप्ति में बताया गया है कि 24 मार्च, 2025 को खतियानी परिवार ने रांची में एक प्रेस वार्ता के बाद झारखंड विधानसभा का घेराव किया था। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक ज्ञापन सौंपकर विस्थापन नीति को लागू करने का आग्रह किया गया था।
अब जब मंत्रिमंडल ने इस नीति को स्वीकार कर लिया है, तो खतियानी परिवार ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि इसे जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जाए ताकि आंदोलनरत जनता की उम्मीदें पूरी हो सकें।
निवेदक
मोहम्मद हकीम
केंद्रीय महासचिव, खतियानी परिवार