राष्ट्र और धर्म की रक्षा करना युवाओं का कर्तव्य है-श्री अविराज सिंह
महेंद्र पाण्डेय सागर
सागर। भगवान श्रीकृष्ण ने युवाओं को संदेश दिया कि राष्ट्र और धर्म की रक्षा करना ही हमारा कर्तव्य है। यह उद्गार भाजपा युवा नेता श्री अविराज सिंह ने कर्रापुर स्थित श्री सिद्ध क्षेत्र पेलेपार देवीघाट मंदिर परिसर में श्रीमद् भागवत कथा स्थल पर व्यक्त किये।
श्रीमद् भागवत गीता और कथा में व्यासपीठ पर विराजमान संत श्री विपिन बिहारी जी को प्रणाम करते हुए श्री अविराज सिंह ने भगवान श्री कृष्ण, सुदामा, अर्जुन, कर्ण एवं पूतना के वृतांत सुनाये। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने संदेश दिया है, कि जीवन में कोई भी परिस्थिति हो, हमें हमेशा मुस्कराते रहना चाहिये। भगवान श्रीकृष्ण जब कालिया नाग से युद्ध कर रहे थे, तब युद्ध करते-करते कालिया नाग के सिर पर चढ़ गये और नृत्य करने लगे।
श्री अविराज सिंह ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण एक आदर्श गुरू हैं। वेद-पुराण में वर्णित है, कि एक आदर्श गुरू वही होता है जो अपने शिष्य की अच्छाई के साथ कमियां भी बताता है और उसका अहंकार भी दूर करता है। महाभारत में अर्जुन और कर्ण के बीच युद्ध चल रहा था, तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था, ‘‘हे! कौंतेय जिस रथ पर तुम विराजमान हो, उस रथ के ऊपर पवनसुत हनुमान तुम्हारी रक्षा कर रहे हैं। तीनों लोकों का स्वामी तुम्हारा सारथी है। उसके बाद भी कर्ण के तीर ने हमारे रथ को दो कदम पीछे कर दिया, तो तुम समझ जाओ किसकी प्रशंसा होना चाहिए।’’ अर्थात भगवान श्रीकृष्ण ने अपने शिष्य का अहंकार तोड़ दिया।
श्री अविराज सिंह ने बताया कि-‘‘अहंकार से मिट गये कुल, गौरव और वंश, न मानो तो देख लो रावण, कौरव, कंस।’’ इसलिए अहंकार कभी नहीं होना चाहिये। भगवान श्रीकृष्ण ने हम सभी युवाओं को हमारा कर्तव्य और धर्म बताया है। हम सभी युवाओं का धर्म है, कि हम सबकी रक्षा करें, सभी का सम्मान करें। भगवान श्रीकृष्ण ने युवा के रूप में ब्रजवासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठा लिया था। उन्होने एक युवा के रूप में अधर्म का अंत किया था। इसलिए हम सभी युवाओं का धर्म और कर्तव्य है, कि हम सभी राष्ट्र की रक्षा, जहां हमारा जन्म हुआ है वहां की रक्षा, धर्म की रक्षा करें।