निरीक्षण के दौरान टीम को गोदाम में सिलाई मशीन, खुले डीएपी के कट्टे, अमोनियम सल्फेट व गेरू मिला। जांच में पाया गया कि इन सामग्रियों को मिलाकर नकली एमओपी (पोटाश) और डीएपी तैयार किया जा रहा था। इसके साथ ही कट्टे सिलने के लिए सिलाई मशीन में प्रयोग किया गया। मौके पर मशीन में जो धागा मिला, वहीं रिपैक किए गए कट्टों में भी पाया गया।
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अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका
बड़े पैमाने पर जिले में नकली खाद बनाने का काम चल रहा हो और पुलिस व कृषि विभाग के किसी सदस्य को इसकी जानकारी न होना, कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस अवैध कारोबार के बारे में पुलिस व कृषि विभाग के अफसरों व कर्मियों को जानकारी थी। उनकी मिलीभगत से काम चल रहा था। अब यह मामला पकड़ा तो उसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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ऊंची पकड़ वाले है धंधेबाज
नकली खाद का कारोबार करने वाले लोग ऊंची पहुंच वाले बताए जा रहे है। ग्रामीणों में चर्चा है कि इस कार्रवाई के बाद इनके लोगों के हमदर्द रसूखदारों की बड़ी सिफारिश के चलते ही कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है। अभी तक न तो केस दर्ज हुआ और न ही कोई गिरफ्तारी हो सकी है। इसके कुछ पहले उझानी इलाके में भी बड़ी मात्रा में नकली खाद बरामद की गई थी।
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बयान
– इस मामले में जांच की जा रही है। उच्चाधिकारियों की अनुमति मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा। – मनोज कुमार रावत, जिला कृषि अधिकारी
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– नकली खाद पकड़ने के मामले में कृषि विभाग की तहरीर मिलने के बाद पुलिस मुकदमा दर्ज करेगी। इस मामले में जो भी दोषी होगा, उन लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। अभी तक कृषि विभाग की तरफ से कोई तहरीर पुलिस को नहीं दी गई है। – डॉ. बृजेश कुमार सिंह, एसएसपी
इंडियन टीवी न्यूज
जिला रिपोर्टर बदायूं
दीपेन्द्र राजपूत