एकीकृत जल कृषि प्रशिक्षण से मत्स्य कृषकों में दिखा उत्साह, परिपक्व मछलियों की हुई हार्वेस्टिंग
हजारीबाग संवाददाता । ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज एजुकेशन (CIFE), मुंबई एवं जिला मत्स्य कार्यालय, हजारीबाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एकीकृत जल कृषि (IMTA) के प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम से स्थानीय मत्स्य कृषकों में नई उम्मीद जगी है। यह कार्यक्रम अनुसूचित जनजाति परियोजना (TSP) के अंतर्गत बरही प्रखंड के ग्राम दरवा में संचालित किया जा रहा है।
मछली, मोती और सिंघाड़ा उत्पादन का प्रशिक्षण
वर्ष 2025 के जनवरी माह में इस कार्यक्रम का पहला चरण आयोजित किया गया था, जिसमें अनुसूचित जनजाति के लाभुकों को मछली पालन, मोती पालन एवं पानी फल (सिंघाड़ा) के उत्पादन के संबंध में व्यावहारिक प्रशिक्षण एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की गई थी। इस दौरान केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी भी दी गई, जिससे मत्स्य उत्पादन की इस एकीकृत पद्धति के प्रति किसानों की विशेष रुचि देखने को मिली।
दूसरे चरण में हार्वेस्टिंग का प्रदर्शन
कार्यक्रम के द्वितीय चरण का आयोजन 13 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2025 तक प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रेम कुमार (ICAR-CIFE मुंबई) एवं श्री प्रदीप कुमार (जिला मत्स्य पदाधिकारी, हजारीबाग) के नेतृत्व में किया जा रहा है।
आज (14 अक्टूबर 2025) को पूर्व में संचित किए गए मत्स्य बीजों के परिपक्व होने के उपरांत मत्स्य शिकार (हार्वेस्टिंग) का प्रदर्शन किया गया। तालाब से बड़े-बड़े मछलियों को निकलता देख स्थानीय मत्स्य कृषक अत्यंत उत्साहित दिखे। ग्रामीणों ने इस प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम की सराहना की।
ग्राम दरवा के ग्रामीणों एवं उपस्थित मत्स्य कृषकों ने इस सफल आयोजन हेतु निदेशक मत्स्य, झारखंड रांची एवं निदेशक, ICAR-CIFE मुंबई को धन्यवाद ज्ञापित किया तथा भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की मांग की है।
(जिला जनसंपर्क कार्यालय, हजारीबाग द्वारा जारी)