नरेश सोनी इंडियन टीवी न्यूज नेशनल ब्यूरो हजारीबाग
मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को किया गया याद, बताई गई उनकी विद्वता
हजारीबाग: स्वाधीन भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री और ‘भारत रत्न’ से सम्मानित मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की 137वीं जयंती जिला कांग्रेस कार्यालय, कृष्ण बल्लभ आश्रम में मनाई गई। इस अवसर पर उनके चित्र पर माल्यार्पण किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला मीडिया अध्यक्ष निसार खान ने मौलाना आज़ाद को अरबी-फारसी का विद्वान बताते हुए कहा कि वे इस सदी के प्रारंभ में ही स्वाधीनता संग्राम में कूद पड़े थे। निसार खान ने बताया कि संभवतः वह अकेले ऐसे नेता थे जिन्होंने प्रथम विश्वयुद्ध (1914-1918) और द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) दोनों महायुद्धों के दौरान कारावास भुगता।
प्रदेश उपाध्यक्ष भीम कुमार ने मौलाना आज़ाद को स्वराज आंदोलन में हमेशा अग्रणी रहने वाला नेता बताया। उन्होंने मौलाना आज़ाद की सबसे बड़ी विशेषता बताते हुए कहा कि उन्होंने द्विराष्ट्र सिद्धांत को कभी स्वीकार नहीं किया और वह सह-अस्तित्व पर जबरदस्त विश्वास रखने वाले प्रमुख नेताओं में से थे। भीम कुमार ने कहा कि इसी कारण देश के विभाजन के बाद भी लाखों मुस्लिमों की आस्था देश के प्रति गहरी बनी रही। मदीना के मुफ्ती के पौत्र मौलाना आज़ाद मुस्लिमों को संगठित कर देश की राष्ट्रीय मुख्यधारा में रखने में सफल रहे। उन्हें मरणोपरांत “भारत रत्न” से नवाजा गया था।
इस अवसर पर नगर अध्यक्ष परवेज़ अहमद, दिलीप कुमार रवि, बाबर अंसारी, विजय कुमार सिंह, शिव नंदन साहू, मोहम्मद रब्बानी, एवं प्रखंड अध्यक्षों में नरसिंह प्रजापति, अजित कुमार सिंह, गोवर्धन गंझू, अब्दुल मनान वारसी, गौतम कुमार मेहता, मोहम्मद मोइनुद्दीन, नौशाद आलम, इदरीश अंसारी, अर्जुन नायक, चन्द्र शेखर आजाद, अनिल कुमार भुईंया सहित कई कांग्रेसी कार्यकर्ता उपस्थित थे।