अवैध पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड का फल-फूल रहा धंधा
मंडल ब्यूरो चीफ चंद्रजीत सिंह की रिपोर्ट
सोनभद्र/ जिले का बीजपुर क्षेत्र इन दिनों अवैध रूप से मेडिकल प्रैक्टिस कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों के चंगुल में जकड़ा हुआ है।स्वास्थ्य विभाग की आंखों के सामने तथाकथित झोलाछाप डॉक्टरों का मायाजाल इतनी बुरी तरह फैल चुका है कि क्षेत्र के गरीब और सीधे-साधे आदिवासी मरीज इनके शोषण का आसानी से शिकार बन रहे हैं।बीजपुर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में डिग्री विहीन प्रत्येक रोग का शर्तिया इलाज करने का बोर्ड लगाए डॉक्टरों ने अपनी दुकानें सजा रखी हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऐसे डॉक्टर मामूली सर्दी-जुकाम बुखार होने पर भी गरीब आदिवासी मरीजों को गंभीर बीमारी का डर दिखाते हैं।इसके बाद शुरू होता है किस्तों में मोटी रकम वसूलने का सिलसिला।मजबूरी और जानकारी के अभाव में ग्रामीण अपनी मेहनत की कमाई इन लुटेरों के हवाले कर रहे हैं।क्षेत्र में चल रहे अवैध पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटर इन झोलाछाप डॉक्टरों के लिए ‘कमाऊ पूत’ साबित हो रहे हैं।यह एक सुनियोजित सिंडिकेट की तरह काम कर रहा है डॉक्टर जानबूझकर मरीजों को ऐसी पैथोलॉजी लैब या डायग्नोस्टिक सेंटर में भेजते हैं जिनके पास न तो वैध लाइसेंस है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ।खून या पेशाब की जांच पर इन डॉक्टरों का मोटा कमीशन बंधा होता है।कमीशन के चक्कर में बिना जरूरत के भी दर्जनों जाँच पर्ची लिख दी जाती हैं।सोनभद्र के इस वनांचल क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का पूरा फायदा अवैध संचालक उठा रहे हैं।कई बार गलत इंजेक्शन और गलत इलाज के कारण मरीजों की हालत बिगड़ जाती है जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में अन्यत्र रेफर कर दिया जाता है।ऐसे में कई गरीब मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।बीजपुर क्षेत्र में स्वास्थ्य माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं है।ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी इन अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।बीजपुर क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों तथा अवैध जाँच केंद्रों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जरूरत है ताकि आदिवासियों के जीवन को सुरक्षित किया जा सके।