रिपोर्ट अजय सिंह तोमर
पोरसा : जिला मुरैना के कथा व्यास पंडित अरुण शास्त्री जी दोहरोटा वाले कथा स्थान मनिअप्पा वार्ड क्रमांक 4 बेगूसराय बिहार मैं कथा कर रहे हैं जिसमें ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की उत्पत्ति, मनुष्यों का जन्म, ध्रुव की कठोर तपस्या और प्रहलाद की अटूट भक्ति जैसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक विषयों पर प्रकाश डाला जाता है, ताकि भक्तों को वैराग्य, निष्ठा और ईश्वर प्रेम का मार्ग सिखाया जा सके।
मुख्य प्रसंग और शिक्षाएं:
सृष्टि की रचना: बताया जाता है कि कैसे ब्रह्मा जी विष्णु की नाभि से उत्पन्न हुए और ब्रह्मांड का निर्माण किया, जिससे सृष्टि का आरंभ हुआ।
मनु और शतरूपा: इनके माध्यम से मानव जाति की उत्पत्ति और संसार के आरंभिक स्वरूप को समझाया जाता है।
प्रहलाद चरित्र: अत्याचारी हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद की भक्ति और उसके उद्धार की कथा, जो ईश्वर पर अटूट विश्वास का प्रतीक है।
ध्रुव चरित्र: बचपन में ही कठिन तपस्या से भगवान को प्राप्त करने वाले ध्रुव की कथा, जो निष्ठा और दृढ़ विश्वास का महत्व बताती है।
सती और शिव: पति-परायणता, निष्ठा और आत्म-बलिदान का प्रतीक, सती के अपने पति के अपमान को न सह पाने की कथा।
कथा का सार:
तीसरे दिन की कथा भक्तों को सिखाती है कि कैसे अपनी बुद्धि (मन) को नियंत्रित करें और बुरे विचारों (दानव) पर अच्छे विचारों (देवता) की विजय प्राप्त करें, जिससे जीवन सुखी और आनंदमय बन सके। यह दिन भक्ति, वैराग्य और सच्ची निष्ठा का मार्ग दिखाता है।