रिपोर्टर : जाकिर झंकार आहवा
डांग जिले में माताओं और नवजात शिशुओं को अस्पताल से सुरक्षित रूप से घर तक पहुंचाने वाली “खिलखिलाट” सेवा अनुदान के अभाव में प्रभावित हो गई है। पूर्व में जिले में सुचारु रूप से संचालित यह सेवा अब आंशिक रूप से बंद होने से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिले में संचालित 4 वैन में से 2 वैन को बंद कर दिया गया है। इसके कारण शेष 2 वैन पर कार्यभार बढ़ गया है और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद माताओं एवं नवजात शिशुओं को घर पहुंचाने में विलंब हो रहा है।
यह सेवा सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद माता और शिशु को निःशुल्क उनके घर तक पहुंचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही थी। विशेष रूप से दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं के लिए यह सेवा वरदान साबित हुई थी।
अनुदान की कमी के कारण Subir स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तथा Pipari स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) से जुड़ी वैन सेवाएं अचानक बंद कर दी गई हैं। इससे मातृत्व एवं शिशु सुरक्षा सेवाओं पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
जिले में जन्मदर अपेक्षाकृत अधिक होने के बावजूद वाहनों की संख्या घटने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। दूरस्थ गांवों के परिवारों के लिए अस्पताल से घर लौटना अब और अधिक कठिन हो गया है।
आंतरिक सूत्रों के अनुसार, अनुदान में कमी के चलते यह निर्णय लिया गया है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने बंद की गई दोनों वैन सेवाओं को शीघ्र पुनः प्रारंभ करने तथा अतिरिक्त ग्रांट जारी करने की मांग की है।
जिला वासियों का कहना है कि मातृ एवं शिशु सुरक्षा से जुड़ी इस महत्वपूर्ण सेवा में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए और शासन को इस दिशा में तत्काल आवश्यक कदम उठाने चाहिए।