उरई(जालौन):
जनपद में सुशासन की भावना को साकार करते हुए जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने प्रातः 10 बजे अपने कार्यालय कक्ष से अधिकारियों को वर्चुअल माध्यम से जोड़कर दूर-दराज क्षेत्रों से आए फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता पूर्वक सुना। उन्होंने प्राप्त प्रकरणों पर त्वरित एवं गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। जनसुनवाई के दौरान एक मार्मिक प्रकरण सामने आया। आभा श्रीवास्तव, जो दोनों पैरों से दिव्यांग हैं, ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर बताया कि उनकी पुत्री दीपाली कक्षा 5 एवं पुत्र दर्शन कक्षा 4 वर्तमान में अध्ययनरत हैं, किंतु वे चाहती हैं कि दोनों बच्चों का प्रवेश किसी अच्छे विद्यालय में कराया जाए, ताकि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें और उच्च पदों पर आसीन हो सकें। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल बेसिक शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि बच्चों का प्रवेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम आरटीई के तहत सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के आरटीई फार्म भरवाने से लेकर प्रवेश की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं समयबद्ध ढंग से पूर्ण की जाए तथा उनकी शिक्षा-दीक्षा में किसी प्रकार की कमी न रहने पाए। जिलाधिकारी ने कहा कि शासन गरीब, असहाय एवं निर्धन वर्ग के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है और पात्र व्यक्तियों को योजनाओं का लाभ दिलाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक प्रकरण को संवेदनशीलता के साथ लेते हुए निर्धारित समयसीमा में निस्तारित किया जाए।जिलाधिकारी ने पूरे जनपद के प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया की फरियादियों की शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण ही हम सबका उद्देश्य है।
(अनिल कुमार ओझा ब्यूरो प्रमुख उरई-जालौन) उत्तर प्रदेश