इंडियन टीवी न्यूज रिपोर्टर संतोष गोल्हानी लखनादौन (सिवनी)
जहाँ एक ओर सरकार ‘स्वच्छ भारत अभियान’ और ‘शासकीय संपत्ति की सुरक्षा’ के लिए करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं लखनादौन के स्वामी विवेकानंद शासकीय महाविद्यालय में नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं।
मुख्य खबर:
कॉलेज की मुख्य दीवारें अब शिक्षा के संदेशों के बजाय निजी व्यवसायो के विज्ञापनों का अड्डा बन चुकी हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि ये विज्ञापन किसी सुनसान जगह नहीं, बल्कि सीधे संस्था की मुख्य दीवारों पर चिपकाए गए हैं।
प्रशासन पर सवाल:
क्या प्राचार्य (संस्था प्रमुख) ने इन निजी विज्ञापनदाताओं को व्यावसायिक लाभ के लिए मूक अनुमति दी है?
‘इस प्रकार सरकारी सम्पति पर विज्ञापन नियम विरुद्ध है, तो फिर कॉलेज प्रशासन अब तक मौन क्यों है?
क्या इन पोस्टरों से होने वाली कमाई कॉलेज के खाते में जा रही है या यह सीधे तौर पर पदीय कर्तव्यों की अनदेखी है?
तस्वीरों का सच:
वायरल हो रही तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि निजी संस्थान के पोस्टर और मोबाइल नंबर दीवार पर चमक रहे हैं। जागरूक नागरिकों का कहना है कि यह न केवल सरकारी संपत्ति का अपमान है, बल्कि कॉलेज प्रशासन की विज्ञापनदाताओं के साथ मिलीभगत की ओर भी इशारा करता है।
मांग:
क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग से मांग की है कि कॉलेज के प्राचार्य की जवाबदेही तय की जाए और इन विज्ञापनों को तुरंत हटाकर दोषियों पर जुर्माना लगाया जाए।