लंगर सेवा समाज में प्यार और बराबरी की भावना जगाती है: संत बाबा दलवारा सिंह
फतेहगढ़ साहिब/ अमलोह अजय कुमार
लंगर सेवा केवल भूख मिटाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में प्यार, भाईचारे और समानता का संदेश फैलाने का एक सशक्त माध्यम भी है। यह विचार संत बाबा दलवारा सिंह रोहिसर साहिब और जत्थेदार जगजीत सिंह ने उस समय व्यक्त किए, जब पीजीआई के मरीजों और उनके परिजनों के लिए लंगर रवाना किया गया।
उन्होंने कहा कि लंगर सेवा सिख धर्म की एक महान और पवित्र परंपरा है, जिसकी शुरुआत गुरु नानक देव जी ने की थी। इसका मुख्य उद्देश्य मानवता की सेवा करना और सभी लोगों को बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन करवाना है।
संत बाबा दलवारा सिंह ने बताया कि लंगर में हर व्यक्ति—चाहे उसका धर्म, जाति, लिंग या आर्थिक स्थिति कुछ भी हो—बिना किसी भेदभाव के मुफ्त भोजन प्राप्त कर सकता है। यह सेवा सिख धर्म के मूल सिद्धांत ‘वंड छको’ से जुड़ी हुई है, जिसका अर्थ है कि जो कुछ हमारे पास है, उसे दूसरों के साथ बांटना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि पीजीआई के लिए लंगर सेवा लगातार जारी है और यह जरूरतमंदों के लिए बड़ी राहत का काम कर रही है। जब सभी लोग एक पंक्ति में बैठकर भोजन करते हैं, तो समाज में मौजूद ऊंच-नीच की भावना स्वतः समाप्त हो जाती है और आपसी एकता मजबूत होती है।
उन्होंने कहा कि आज के समय में भी लंगर सेवा का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि यह इंसानियत की भलाई के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आ रही है। यह सेवा हमें सिखाती है कि सच्ची खुशी दूसरों की मदद और सेवा करने में ही निहित है।
इस अवसर पर कमलजीत सिंह, करमजीत सिंह, हरबंस सिंह, बलबीर सिंह, दलबाग सिंह, मंगल सिंह और दिलप्रीत सिंह सहित अन्य उपस्थित रहे।
फोटो कैप्शन:
संत बाबा दलवारा सिंह रोहिसर साहिब, जत्थेदार जगजीत सिंह व अन्य लंगर रवाना करते हुए।