आशीष मिश्रा
गाजियाबाद – गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के अंतर्गत आने वाली तुलसी निकेतन कॉलोनी में जीडीए सुपरवाइजर की मिलीभगत से अवैध सबमर्सिबल बोरवेल लगवाने का मामला सामने आया है। फ्लैटों के बाहर रास्ते में बोरवेल लगवाकर पत्थर के थमले बना दिए गए हैं, जिससे आम रास्ता बाधित हो रहा है और आए दिन हादसे हो रहे हैं।
रेस्टोरेंट से चर्च वाली गली तक अवैध निर्माण
तुलसी निकेतन फ्लैटों में एमके रेस्टोरेंट, मंदिर के सामने से चर्च वाली गली में जर्जर इमारतों के बीच लोगों द्वारा अवैध रूप से फ्लैटों के बाहर सबमर्सिबल बोरिंग कराई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब जीडीए के सुपरवाइजर की मिलीभगत से मोटा लेनदेन कर कराया जा रहा है। बोरवेल के लिए बनाए गए पत्थर के थमले सड़क के बीचो-बीच खड़े कर दिए गए हैं, जिन्हें जमीन के अंदर नहीं दबाया गया।
रास्ता संकरा, हादसे आम
इन थमलों के कारण कई जगहों पर रास्ता संकरा हो गया है और कुछ स्थानों पर पूरी तरह बाधित हो चुका है। राहगीरों, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। बाइक व अन्य वाहनों के टकराने से आए दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस समस्या की शिकायत कई बार जीडीए के अवर अभियंता, सुपरवाइजर और अन्य संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। अधिकारियों की चुप्पी से लोगों में भारी रोष है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
गौरतलब है कि इसी कॉलोनी में जर्जर इमारतों के कारण पहले भी हादसे हो चुके हैं। हाल ही में एक बालकनी का छज्जा गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद जीडीए की ओर से सुरक्षा को लेकर कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासन की लापरवाही लगातार लोगों की जान पर भारी पड़ रही है।
उच्च अधिकारियों से शिकायत की तैयारी
स्थानीय नागरिकों ने अब इस पूरे मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने का निर्णय लिया है। जल्द ही जिलाधिकारी और अन्य संबंधित विभागों को लिखित शिकायत दी जाएगी। लोगों की मांग है कि अवैध रूप से लगाए गए सबमर्सिबल बोरवेल के पत्थर के थमलों को तत्काल हटाया जाए, रास्तों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
तुलसी निकेतन कॉलोनी के इस मामले ने एक बार फिर जीडीए की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जीडीए इस गंभीर समस्या पर कब कार्रवाई करता है या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।
आशीष मिश्रा की खास रिपोर्ट