बड़ेगाँव में स्वास्थ्य व्यवस्था रामभरोसे! पशु अस्पताल में हो रहा है इंसानों का इलाज।
बड़ा खुलासा: इमारत को जर्जर घोषित करने के दो महीने पहले ही नूतनीकरण के नाम पर फूंके लाखों रुपए।
ग्रामीणों का सवाल: जिला परिषद सदस्य डोमेश्वरी बाई बघेले को सूचना देने के बाद भी बड़ेगाँव को नया अस्पताल कब मिलेगा?
एक तरफ सरकार ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं शासकीय लापरवाही का एक ऐसा जीता-जागता उदाहरण, जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। महाराष्ट्र के गोंदिया जिला अंतर्गत आने वाली तिरोड़ा तहसील के बड़ेगाँव से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) की मुख्य इमारत होने के बावजूद, आज इंसानों का इलाज मजबूरी में जानवरों के अस्पताल में किया जा रहा है। देखिए हमारी यह खास ग्राउंड रिपोर्ट
यह जो तस्वीरें आप अपनी स्क्रीन पर देख रहे हैं, यह किसी बदहाल व्यवस्था की बानगी हैं। बड़ेगाँव में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को अब चूँकि पशुवैद्यकीय अस्पताल यानी जानवरों के दवाखाने में शिफ्ट कर दिया गया है। इस पशु अस्पताल के परिसर में कर्मचारियों के रहने के लिए बने क्वार्टर का इस्तेमाल अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में हो रहा है। जिस जगह पर मवेशियों और जानवरों का इलाज होना चाहिए था, वहाँ आज इंसानों का इलाज किया जा रहा है, जो कि बेहद चिंताजनक है।
जब इस गंभीर स्थिति को लेकर हमारे संवाददाता ने बड़ेगाँव के संबंधित डॉक्टरों से बात की, तो कई कड़वे सच सामने आए। डॉक्टरों के मुताबिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की पुरानी इमारत को ‘डिसमेंटल’ यानी जर्जर और ढहाने योग्य घोषित कर दिया गया है। इस विषय में डॉक्टरों द्वारा पहले ही जिला परिषद सदस्य डोमेश्वरी बाई बघेले को लिखित सूचना दी जा चुकी थी कि उन्हें तुरंत नई इमारत बनाकर दी जाए या फिर इस इमारत की मरम्मत कराई जाए।
लेकिन इस पूरे मामले में सरकारी धन का जो दुरुपयोग हुआ है, वह वाकई हैरान करने वाला है। जिस इमारत को प्रशासन ने जर्जर और बेकार घोषित कर दिया, उस घोषणा के ठीक दो महीने पहले ही इस पूरी इमारत के फर्श (फ्लोरिंग) का नया नवीनीकरण किया गया था। अगर इमारत को ढहाना ही था, तो जनता के टैक्स के पैसों से यह फिजूलखर्ची किसके इशारे पर की गई? यह एक बड़ा सवाल है।
मौजूदा स्थिति यह है कि बड़ेगाँव की इस पुरानी इमारत का उपयोग मरीजों के लिए नहीं, बल्कि केवल कर्मचारियों के वाहनों को खड़ा करने यानी ‘पार्किंग लॉट’ के रूप में किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इस सरकारी संपत्ति की सुरक्षा को लेकर भी भारी लापरवाही बरती गई है। इमारत के आस-पास बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई है और प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ कुछ व्यक्तिगत स्वार्थ के चलते इस इमारत को जानबूझकर डैमेज (नुकसान) पहुँचाया गया है। इस तोड़-फोड़ और सरकारी पैसों की बर्बादी के पीछे किसका हाथ है? इसकी निष्पक्ष जाँच होना बेहद जरूरी है।
लंबे समय से बड़ेगाँव के ग्रामीणों को एक नए और सुसज्जित अस्पताल की दरकार है। जिला परिषद सदस्य को सूचना देने के बावजूद अब तक प्रशासन ने इस ओर गंभीरता क्यों नहीं दिखाई, यह बड़ा सवाल है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ओर कब ध्यान देता है और क्या इस वित्तीय गड़बड़ी की जाँच होगी?
गोंदिया जिल्हा रिपोर्टर महेंद्र कनोजे कि रिपोट