इंडियन टीवी न्यूज़ चैनल संवाददाता मानस अवस्थी की रिपोर्ट
बालूपुर, अजयगढ़, पन्ना।
मधुगांव मध्य सिंचाई परियोजना के निर्माण के चलते अजयगढ़ तहसील के ग्राम बालूपुर में एक आदिवासी परिवार बेघर हो गया। पीड़ित माता प्रसाद आदिवासी का कच्चा मकान पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया है। अब वह टूटी दीवारों और ईंटों के मलबे के बीच खड़ा होकर अपना दर्द बयां कर रहा है।
क्या है मामला
ग्रामीण माता प्रसाद का कहना है कि सिंचाई परियोजना के नाम पर बिना पर्याप्त सूचना और वैकल्पिक व्यवस्था के उनका पुश्तैनी घर गिरा दिया गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि घर की दीवारें ढह चुकी हैं, छत का नामोनिशान नहीं है और सामान मलबे में दबा पड़ा है। माता प्रसाद मलबे के बीच खड़े होकर बता रहे हैं कि अब उनके पास सिर छिपाने की जगह भी नहीं बची।
परिवार का आरोप
1. मुआवजे का इंतजार: माता प्रसाद का आरोप है कि घर गिराने से पहले न तो उचित मुआवजा मिला और न ही पुनर्वास की कोई व्यवस्था की गई।
2. रात गुजारना मुश्किल: घर टूटने के बाद परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।
3. प्रशासन पर सवाल: ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना जरूरी है, लेकिन गरीब आदिवासियों को उजाड़कर विकास का क्या मतलब।
अधिकारियों का पक्ष
इस मामले में अभी सिंचाई विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पीड़ित परिवार ने कलेक्टर से न्याय और तत्काल मदद की गुहार लगाई है।
बड़ा सवाल
मधुगांव मध्य सिंचाई परियोजना से इलाके को पानी मिलना तय है, लेकिन बालूपुर जैसे गांवों में इस विकास की कीमत आदिवासी परिवार अपने आशियाने से चुका रहे हैं। मुआवजा और पुनर्वास नीति पर सवाल बरकरार हैं