किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
बिलासपुर।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के अवार्ड को बरकरार रखते हुए बीमा कंपनी की याचिका खारिज कर दी है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि मालवाहक वाहन में ‘मानार्थ यात्री’ (मुफ्त सवारी) के रूप में यात्रा कर रहे व्यक्ति की दुर्घटना में मौत होने पर भी ‘पे एंड रिकवर’ सिद्धांत लागू होगा।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में बीमा कंपनी पहले पीड़ित परिवार को निर्धारित मुआवजा राशि का भुगतान करेगी।
इसके बाद यदि नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो बीमा कंपनी वाहन मालिक से उक्त राशि की वसूली करने के लिए स्वतंत्र होगी।
अदालत ने माना कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके आश्रितों को समय पर राहत मिलना सर्वोपरि है। इसलिए तकनीकी आधार पर मुआवजे में देरी करना न्यायसंगत नहीं होगा।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील को खारिज करते हुए एमएसीटी द्वारा दिए गए मुआवजा आदेश को यथावत रखा।
इस फैसले से सड़क दुर्घटना पीड़ित परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता सुनिश्चित करने के सिद्धांत को और मजबूती मिली है।