किशोर कुमार छत्तीसगढ़ स्टेट रिपोर्टर इंडियन टीवी न्यूज नेशनल
नारायणपुर। आजादी के 80वें स्वतंत्रता दिवस पर अबूझमाड़ के 9 गांवों में पहली बार तिरंगा शान से लहराया गया। लंबे समय तक नक्सल हिंसा और भय के प्रभाव में रहे इन गांवों में 15 अगस्त 2026 को माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। ग्रामीणों के हाथों में तिरंगा था, चेहरों पर मुस्कान और दिल में देशभक्ति का जज्बा दिखाई दिया।
नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे इन इलाकों में नक्सल उन्मूलन के बाद पहली बार ग्रामीणों ने खुले तौर पर स्वतंत्रता दिवस मनाया और राष्ट्रीय ध्वज फहराया। यह केवल एक समारोह नहीं, बल्कि क्षेत्र में लौटते लोकतांत्रिक विश्वास और बदलाव की बड़ी तस्वीर के रूप में सामने आया।
इन 9 गांवों में पहली बार फहराया तिरंगा
अबूझमाड़ के कोरसकोडो, हचेकोटी, आदनार, बोटेर, कुमनार, दिवालुर, गुंडेकोट, रेकापाल और रासमेटा गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस का आयोजन उत्साह के साथ किया गया।
दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के साथ लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों और भय के वातावरण के कारण इन गांवों में राष्ट्रीय पर्वों को खुले तौर पर मनाना आसान नहीं था। ऐसे में पहली बार तिरंगा फहराया जाना ग्रामीणों के लिए बेहद खास और भावुक पल रहा।
सुरक्षाबलों के प्रयासों से बदली तस्वीर
नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक संदीप पटेल ने कहा, “सुरक्षाबलों के लगातार प्रयासों के चलते हम इस स्थिति में आ गए हैं कि नक्सलमुक्त होने के बाद कई गांवों में पहली बार तिरंगा फहराया गया है।”
वहीं, कलेक्टर नम्रता जैन ने कहा, “अब जिला नक्सलमुक्त घोषित हो चुका है। हम सबका प्रयास होना चाहिए कि सभी के प्रयासों से यह जिला विकास की नई गौरव गाथा लिखे।”
जहां कभी बंदूक और भय था, वहां गूंजा राष्ट्रगान
इन गांवों में ग्रामीणों ने सुरक्षाबलों के साथ मिलकर स्वतंत्रता दिवस मनाया। वर्षों के भय के बाद ग्रामीणों में बढ़ता आत्मविश्वास साफ नजर आया। तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान के दौरान ग्रामीणों की भागीदारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत बनी।
अबूझमाड़ के इन इलाकों में जहां कभी बंदूक और हिंसा की चर्चा होती थी, वहां अब तिरंगा, राष्ट्रगान और विकास की तस्वीर दिखाई दे रही है।
नक्सलमुक्त घोषणा के बाद पहला स्वतंत्रता दिवस
31 मार्च 2026 के बाद नक्सलमुक्त घोषित क्षेत्र में 15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस विशेष महत्व रखता है। इन 9 गांवों में पहली बार राष्ट्रीय पर्व को खुले तौर पर मनाया गया। ग्रामीणों ने पूरे सम्मान और उत्साह के साथ राष्ट्रध्वज फहराया।
कई ग्रामीणों के लिए यह महज सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उनके जीवन में आए बदलाव का प्रतीक था। आजादी के 80वें वर्ष में अबूझमाड़ के इन गांवों में लहराता तिरंगा यह संदेश देता नजर आया कि लंबे संघर्ष और भय के बाद क्षेत्र में शांति, लोकतंत्र और विकास की नई शुरुआत हो रही है।