नई दिल्ली/रायपुर: केंद्र सरकार देश के विमानन क्षेत्र में निजी भागीदारी और बुनियादी ढांचे को विस्तार देने के लिए 11 प्रमुख हवाई अड्डों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत निजी हाथों में सौंपने जा रही है। 50 वर्षों की लीज अवधि वाले इस प्रस्ताव को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (PPPAC) से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है।
इस योजना के तहत नागर विमानन मंत्रालय ने बड़े और छोटे हवाई अड्डों का संतुलन बनाते हुए 5 विशेष समूह (क्लस्टर) तैयार किए हैं। प्रत्येक समूह का संचालन और प्रबंधन एक ही निजी कंपनी को सौंपा जाएगा।
निजी कंपनियों द्वारा इन हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार के लिए लगभग ₹8,622 करोड़ के पूंजी निवेश का अनुमान है। बाजार में किसी एक कंपनी के एकाधिकार और वित्तीय जोखिम को रोकने के लिए एक बोलीदाता (Bidder) को मिलने वाले समूहों की अधिकतम संख्या सीमित रखने का प्रावधान किया गया है।
कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) के मौजूदा कर्मचारियों के संरक्षण के लिए विशेष शर्तें तय की गई हैं:
1 साल का संयुक्त प्रबंधन: निजी ऑपरेटर को पहले साल AAI कर्मचारियों के साथ मिलकर संचालन करना होगा।
3 साल तक 60% स्टाफ अनिवार्य: संचालन संभालने के बाद निजी कंपनी को कम से कम 3 वर्षों तक AAI के न्यूनतम 60 प्रतिशत कर्मचारियों को सेवा में बनाए रखना होगा।
डेटा और क्षमता के आधार पर हुआ चयन
AAI ने यात्री भार, व्यावसायिक क्षमता, भूमि उपलब्धता और वित्तीय प्रदर्शन के विस्तृत विश्लेषण के बाद 12 बड़े और 136 छोटे हवाई अड्डों का मूल्यांकन किया। इसी डेटा आधारित प्रक्रिया के जरिए 5 बड़े और 6 छोटे एयरपोर्ट्स को मिलाकर यह 11 हवाई अड्डों का क्लब तैयार किया गया है।
अभिषेक कुमार पाण्डेय रिपोर्टर बिलासपुर छत्तीसगढ़