🚨 BREAKING NEWS | सहारनपुर में PNB करेंसी चेस्ट का मामला और गंभीर, जाली नोटों का आंकड़ा करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचा
💰 पहले ₹7.40 करोड़ की जाली करेंसी मिली, जांच बढ़ी तो रकम करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचने की जानकारी; असली नोट निकालकर नकली रखने की आशंका, 3 बैंक अधिकारी निलंबित, SIT के हाथ में जांच
सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक की घंटाघर स्थित सोफिया मार्केट करेंसी चेस्ट में सामने आया जाली करेंसी का मामला अब बेहद गंभीर रूप लेता जा रहा है। शुरुआती ऑडिट में करीब ₹7.40 करोड़ की कथित जाली करेंसी मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन नोटों की जांच और मिलान आगे बढ़ने के साथ यह आंकड़ा करीब ₹17 करोड़ तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। हालांकि अंतिम रकम का आधिकारिक आंकड़ा बैंक की विस्तृत जांच और करेंसी मिलान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
🔴 ₹7.40 करोड़ से बढ़कर ₹17 करोड़—आखिर करेंसी चेस्ट में हुआ क्या?
शुरुआती जांच में 500 रुपये के नोटों के 148 बंडलों में करीब 1,000-1,000 कथित जाली नोट मिलने की बात सामने आई थी, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹7.40 करोड़ बताई गई। अब जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, संदिग्ध नोटों की संख्या और रकम बढ़ती जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि करेंसी चेस्ट जैसी सुरक्षित व्यवस्था में इतनी बड़ी मात्रा में कथित जाली नोट पहुंचे कैसे?
💰 असली नोट निकालकर नकली रखने की आशंका
जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण आशंका यह सामने आई है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि करेंसी चेस्ट में मौजूद असली नोटों को निकालकर उनकी जगह जाली नोट रखे गए हों और असली रकम को कहीं और खपा दिया गया हो।
अगर जांच में यह आशंका सही साबित होती है तो मामला केवल नकली नोट मिलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह करोड़ों रुपये की सुनियोजित वित्तीय अनियमितता और बैंकिंग धोखाधड़ी का मामला बन सकता है।
🚨 तीन बैंक अधिकारियों पर गिरी गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने करेंसी चेस्ट और संबंधित संचालन से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की है। जांच के दायरे में बताए जा रहे नामों में वरिष्ठ प्रबंधक रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और जगाधरी के खेरा बाजार करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
महत्वपूर्ण: निलंबन या जांच के दायरे में होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं है। संबंधित अधिकारियों की भूमिका जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
💥 ₹4.36 लाख की कमी से खुला करोड़ों के जाली नोटों का राज?
इस पूरे मामले की शुरुआत एक अन्य वित्तीय गड़बड़ी से हुई। RBI को भेजी गई करेंसी के मिलान के दौरान करीब ₹4.36 लाख की कमी सामने आई थी। इसके बाद बैंक स्तर पर जांच शुरू हुई और करेंसी चेस्ट के ऑडिट में कथित जाली नोटों का बड़ा मामला सामने आया।
यानी सवाल अब केवल ₹4.36 लाख की कमी का नहीं है—उस कमी की जांच करते-करते करोड़ों रुपये की संदिग्ध करेंसी तक जांच कैसे पहुंची, यह पूरे मामले की अहम कड़ी बन गई है।
🕵️♂️ SIT करेगी पूरे मामले की गहराई से जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने SIT गठित कर जांच शुरू कर दी है। जांच में करेंसी चेस्ट में नकदी के आने-जाने, जमा और निकासी के रिकॉर्ड, नोटों की गिनती-पैकिंग, मिलान दस्तावेज और CCTV फुटेज समेत कई बिंदुओं को खंगाला जा रहा है।
जांचकर्ताओं के सामने मुख्य सवाल हैं—
- कथित जाली नोट करेंसी चेस्ट तक किस रास्ते से पहुंचे?
- असली नोटों की जगह नकली नोट किस स्तर पर रखे गए?
- नोटों की गिनती और सत्यापन के दौरान यह गड़बड़ी पकड़ में क्यों नहीं आई?
- करेंसी चेस्ट में आने वाली रकम का रिकॉर्ड किसने तैयार किया?
- CCTV में किन लोगों की गतिविधियां सामने आती हैं?
- क्या इस मामले में बैंक के अंदर और बाहर किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका है?
- कथित रूप से निकाली गई असली रकम आखिर कहां गई?
🎥 CCTV और बैंक रिकॉर्ड बनेंगे सबसे अहम सबूत
करेंसी चेस्ट में नकदी की आवाजाही से जुड़े CCTV फुटेज और दस्तावेजी रिकॉर्ड जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जांच एजेंसियां यह मिलान करने की कोशिश करेंगी कि जिस समय संबंधित करेंसी चेस्ट में करोड़ों रुपये की नकदी जमा या स्थानांतरित हुई, उस दौरान कौन-कौन लोग वहां मौजूद थे।
इसके साथ ही बैंक के लॉग, कैश बुक, करेंसी पैकेट, रजिस्टर और अन्य रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
⚠️ अंतिम आंकड़ा अभी बाकी—₹17 करोड़ से भी आगे जाएगा मामला?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि करेंसी चेस्ट का पूरा ऑडिट अभी जांच के दायरे में है। इसलिए करीब ₹17 करोड़ का आंकड़ा भी अंतिम नहीं माना जा सकता। बैंक की गिनती और मिलान पूरा होने के बाद ही कथित जाली करेंसी की वास्तविक मात्रा सामने आएगी।
🔥 अब बड़ा सवाल—करोड़ों की जाली करेंसी बैंक की तिजोरी तक पहुंची कैसे?
सहारनपुर के इस मामले ने बैंकिंग व्यवस्था की आंतरिक निगरानी, कैश वेरिफिकेशन और करेंसी चेस्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि जांच में यह साबित होता है कि असली करेंसी को व्यवस्थित तरीके से निकालकर उसकी जगह जाली नोट रखे गए थे, तो जांच का दायरा बैंक के कर्मचारियों से आगे बढ़कर कथित नेटवर्क और रकम के अंतिम लाभार्थियों तक पहुंच सकता है।
फिलहाल पुलिस और बैंक की जांच जारी है और अंतिम रकम, जिम्मेदार व्यक्तियों तथा पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
📰 सहारनपुर
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