मयूरभंज/सारसकणा: डॉक्टर की अनुपस्थिति और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चली आ रही नाराजगी रविवार को सारसकणा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उग्र रूप लेती दिखाई दी। बिजली का करंट लगने से दो वर्षीय बच्ची की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल परिसर में हंगामा और तोड़फोड़ किए जाने का आरोप है। इस दौरान अस्पताल से दवाइयां और कुछ चिकित्सा सामग्री बाहर निकालकर आग के हवाले किए जाने का भी आरोप लगाया गया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में काफी देर तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।जानकारी के अनुसार, सारसकणा ब्लॉक के मुंडाकाटा गांव के बेहेरासाही निवासी राजा बेहेरा की दो वर्षीय बेटी चुलबुल शनिवार को घर में खेल रही थी। इसी दौरान वह टेबल फैन के असुरक्षित विद्युत तार के संपर्क में आ गई और गंभीर रूप से घायल हो गई। परिजन तत्काल बच्ची को सारसकणा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।परिजनों के आरोप के अनुसार, उस समय अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। इसके बाद बच्ची को पहले शीर्षा, फिर झारपोखरिया और अंत में बारीपदा स्थित पंडित रघुनाथ मुर्मू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया।बच्ची को समय पर उचित चिकित्सा मिलती तो उसकी जान बच सकती थी या नहीं, यह जांच का विषय है। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टर की कथित अनुपस्थिति को लेकर परिजनों द्वारा उठाए गए सवालों ने सारसकणा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि सारसकणा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टरों की अनुपस्थिति को लेकर पहले भी कई बार शिकायतें सामने आ चुकी हैं। यदि आपातकालीन समय में चिकित्सक की अनुपस्थिति का आरोप सही पाया जाता है, तो यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवा की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला माना जाएगा।बच्ची की मौत के बाद स्थानीय लोगों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया। अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ तथा दवाइयों और चिकित्सा सामग्री को जलाए जाने के आरोप ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।घटना की सूचना मिलने पर झारपोखरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। एहतियात के तौर पर अस्पताल परिसर में पुलिस बल तैनात किया गया। वहीं, सारसकणा के अतिरिक्त तहसीलदार ने मजिस्ट्रेट के रूप में मौके पर पहुंचकर स्थानीय लोगों से बातचीत की।दूसरी ओर, अस्पताल में तोड़फोड़ और दवाइयों को जलाए जाने के आरोपों को लेकर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। बच्ची की मौत का वास्तविक कारण, अस्पताल में डॉक्टर की मौजूदगी तथा इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हुई थी या नहीं—इन सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच अब महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज।