अकोदिया।
12 दिनों तक चले गणेशोत्सव के समापन पर शनिवार शाम अकोदिया के जाटपुरा के युवराज भगवान गणेश की भव्य विसर्जन यात्रा निकाली गई। जाटपुरा सार्वजनिक गणेश उत्सव समिति द्वारा स्थापित गणेश प्रतिमा को श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण विदाई दी। रात 9 बजे शुरू हुए चल समारोह में ऊंट-घोड़ों की अगुवाई, आदिवासी नृत्य दल, आकर्षक झांकियां और ढोल-नगाड़ों की गूंज मुख्य आकर्षण रही। पूरे मार्ग में ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयकारे गूंजते रहे।
इस बार जाटपुरा के युवराज को डीजे के बजाय बैंड, महाकाल ताशे और पारंपरिक ढोल की गूंज के बीच विदाई दी गई। पारंपरिक वेशभूषा में सजे आदिवासी नृत्य दल ने अपनी प्रस्तुति से लोगों का ध्यान खींचा। वहीं रंग-बिरंगी रोशनी से सजी झांकियां चल समारोह की शोभा बढ़ा रही थीं। युवाओं के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी यात्रा में शामिल हुए।
चल समारोह जाटपुरा से प्रारंभ होकर बोलाई रोड, सिद्धिविनायक, भारतीय स्टेट बैंक, परशुराम चौराहा और महाराणा प्रताप बस स्टैंड होते हुए नेवज नदी पहुंचा। यहां विधि-विधान से भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। विसर्जन से पहले श्रद्धालुओं ने आरती कर भगवान गणेश से सुख-समृद्धि और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की।
जगह-जगह पुष्पवर्षा से हुआ स्वागत
चल समारोह के मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया। कई जगह पुष्पवर्षा कर भगवान गणेश का अभिनंदन किया गया। जुलूस देखने के लिए सड़क के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग जमा रहे। घरों की छतों और दुकानों के बाहर से भी लोगों ने चल समारोह का आनंद लिया।
बस स्टैंड पर गूंजे गणेशजी और खाटू श्याम के भजन
महाराणा प्रताप बस स्टैंड पर युवराज गणेश के लिए भव्य स्वागत द्वार सजाया गया। यहां जमकर आतिशबाजी भी हुई। धार्मिक कार्यक्रम में भजन गायिका खुशबू शर्मा ने गणेशजी और खाटू श्यामजी के एक से बढ़कर एक मधुर भजनों की प्रस्तुति दी। भजनों की शुरुआत होते ही श्रद्धालु भक्ति में सराबोर हो गए। ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों के साथ खाटू श्याम के भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए। देर तक चले भजन कार्यक्रम से बस स्टैंड परिसर भक्तिमय बना रहा।
सुरक्षा व्यवस्था रही मुस्तैद
गणेश विसर्जन चल समारोह को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पूरे मार्ग में पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस जवानों ने यातायात व्यवस्था संभालने के साथ जुलूस को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया। 12 दिवसीय गणेशोत्सव के समापन पर अकोदिया में देर रात तक धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।