• आयोजन : पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति पर हुआ 11वां व्याख्यान संपन्न
• भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल स्रोत हमारा प्राचीन लोकजीवन एवं लोक संस्कृति है – सच्चिदानंद जोशी

गहरी हैं। यह वेदों, उपनिषदों, शास्त्रों और लोक साहित्य पर आधारित है। यह जीवन, प्रकृति, समाज और ब्रह्मांड को एक साथ जोड़कर देखने वाला सम्पूर्ण दर्शन है। पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति 11वें व्याख्यान को मुख्य वक्ता की आसंदी से संबोधित करते हुए उक्त बातें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली के सदस्य सचिव, प्रख्यात लेखक एवं शिक्षाविद डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कही। डॉ. जोशी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल स्रोत हमारा प्राचीन लोकजीवन एवं लोक संस्कृति है । हमारी परंपरा वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिनह की परंपरा है। डॉ. जोशी ने कहा कि यह दुःख का विषय है कि हमारी संस्कृति और सांस्कृतिक एकता को कमजोर करने की कोशिशें निरंतर जारी हैं किंतु भारतीय जनमानस की जिजीविषा की जड़ें अत्यंत मजबूत हैं। संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से ग्रामोदय एवं प्रबुद्ध परिषद छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा पर केंद्रित इस व्याख्यान में छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने विषय प्रवर्तन किया। श्री शर्मा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को भारतीय परंपरा की बौद्धिक विरासत के संदर्भ में परिभाषित किया जाना चाहिए। अतिथि वक्ता लेखक संपादक विनोद मिश्र ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में भारत की सांस्कृतिक एकता, साहित्यिक विरासत और जीवन दर्शन के सूत्र मौजूद हैं। प्रबुद्ध परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष अतुल नागले ने आयोजकीय वक्तव्य देते हुए कहा कि इस तरह के वैचारिक आयोजनों से हमारी राष्ट्रीय चेतना मजबूत होती है। आयोजन में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के डॉ. सुधीर लाल भी विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
समारोह के प्रारंभ में अतिथियों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय एवं भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि के साथ समारोह को विधिवत प्रारंभ किया। अतिथियोंका स्वागत डीवी गिरी, सुमन कन्नौजे, हेमंत नायडू, अनिल वशिष्ठ, श्वेता उपाध्याय एवं डॉ. हंसा शुक्ला ने किया । छत्तीसगढ़ का राज्यगीत लोकगायिका रजनी रजक ने प्रस्तुत किया। समारोह के अंत में नयनदीप विद्यालय के दृष्टिबाधित छात्रों ने वन्देमातरम गीत की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन रचना नायडू एवं आभार प्रदर्शन ग्रामोदय की सचिव सुमन कन्नौजे ने किया। समारोह में पद्मश्री उषा बारले, एनपी दीक्षित, ईवी मुरली, राजेंद्र सोनबोइर, डॉ. सुनीता वर्मा, राजीव रंजन, विजय येचुरी, अजय सिंह, मोरध्वज चंद्राकर, घनश्याम देवांगन, श्वेता पड्डा, शंकर चरण पाण्डेय, उपासना साहू, प्रदीप भट्टाचार्य, वीएन पाण्डेय, श्रीमती श्वेता उपाध्याय, डॉ. संजय दानी, जमील अहमद, नौशाद सिद्दीकी, अजय डांगे, प्रभुनाथ मिश्रा, दिनेश वाजपेयी आदि अनेक प्रबुद्ध जन बड़ी संख्या में मौजूद थे।