शिमला: हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक व सियासी दांव खेला है। प्रदेश सरकार ने राज्य की विभिन्न प्रशासनिक इकाइयों—जिलों, उपमंडलों, तहसीलों और विकास खंडों के पुनर्गठन की संभावनाओं की समीक्षा के लिए एक चार सदस्यीय उच्च स्तरीय आयोग का गठन किया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमुूर्ति धर्म चंद चौधरी को इस आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
कांगड़ा और मंडी के विभाजन तथा 5-6 नए जिलों की चर्चा
वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में कुल 12 जिले हैं। सुक्खू सरकार द्वारा आयोग के गठन की अधिसूचना जारी किए जाने के बाद से राज्य के सबसे बड़े जिलों— कांगड़ा और मंडी के पुनर्गठन को लेकर सियासी बाजार बेहद गर्म हो गया है। [1, 2, 3]
अधिसूचना में सीधे तौर पर किसी नए जिले का नाम घोषित नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में रामपुर, पालमपुर, नूरपुर, देहरा और सुंदरनगर (तथा सोलन के बद्दी) को पूर्ण राजस्व जिला बनाने की मांग और चर्चा एक बार फिर से तेज हो गई है।
• कांगड़ा जिला: इस जिले के तहत आने वाले पालमपुर, नूरपुर और देहरा को अलग जिला बनाने की मांग काफी पुरानी है। गौरतलब है कि नूरपुर और देहरा पहले से ही अलग पुलिस जिले के रूप में काम कर रहे हैं।
• मंडी जिला: मंडी के सुंदरनगर क्षेत्र को जिला बनाने का मुद्दा गरमाया हुआ है।
• शिमला जिला: शिमला के सुदूर रामपुर क्षेत्र को भी नया जिला बनाने की लंबे समय से मांग उठती रही है।
आयोग की रूपरेखा और कार्यप्रणाली:
• 6 महीने में सौंपनी होगी रिपोर्ट: आयोग को अधिसूचना जारी होने की तारीख से 6 महीने के भीतर अपनी विशिष्ट सिफारिशों के साथ अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी।
• समीक्षा के मुख्य आधार: नए जिलों या प्रशासनिक इकाइयों के गठन की सिफारिश करते समय आयोग आबादी, भौगोलिक परिस्थितियों, आम जनता की सुविधा, प्रशासनिक दक्षता और वित्तीय प्रभावों का गहन अध्ययन करेगा।
• मुख्यालय और टीम: इस आयोग का मुख्यालय शिमला में होगा। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस (रिटायर्ड) धर्म चंद चौधरी के साथ अधिवक्ता विशाल पंवार और सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी राजेश शर्मा को बतौर सदस्य शामिल किया गया है, जबकि भू-अभिलेख निदेशक इसके सदस्य सचिव होंगे।