रासगोविंदपुर, मयूरभंज: चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, आसमान छूती महंगाई और स्कूलों की रसोइया एवं सहायिकाओं के न्यायसंगत अधिकारों को लेकर रासगोविंदपुर में राजनीतिक आंदोलन तेज हो गया है। केंद्र सरकार की नीतियों और आम जनता की समस्याओं को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस और सीपीआई (एम) की ओर से विशाल जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से लेकर महंगाई पर नियंत्रण तथा रसोइया-सहायिकाओं को सम्मानजनक वेतन देने जैसी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने आवाज बुलंद की।
रासगोविंदपुर तहसील कार्यालय के सामने से निकले इस जुलूस में कांग्रेस और सीपीआई (एम) के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में स्कूलों की रसोइया एवं सहायिकाएं शामिल हुईं। विभिन्न नारों के साथ प्रदर्शनकारियों ने रासगोविंदपुर बाजार की परिक्रमा की और सरकार के खिलाफ विरोध जताया।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए चुनाव में कथित अनियमितताओं को लेकर सत्तारूढ़ दल पर आरोप लगाए। इसके साथ ही महंगाई पर नियंत्रण करने में विफल रहने को लेकर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की भी मांग उठाई।
इस विरोध प्रदर्शन की प्रमुख मांगों में स्कूलों की रसोइया एवं सहायिकाओं की आर्थिक सुरक्षा का मुद्दा भी शामिल रहा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि रसोइया एवं सहायिकाओं को नियमित रूप से वेतन दिया जाए, उनके लिए पेंशन व्यवस्था लागू की जाए तथा उनका मासिक वेतन बढ़ाकर 26 हजार रुपये किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि रसोइया एवं सहायिकाएं स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए उनके श्रम का उचित सम्मान करते हुए उन्हें सम्मानजनक वेतन, नियमित भुगतान और सामाजिक सुरक्षा का लाभ दिया जाना चाहिए।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज की रिपोर्ट।
