*बिहार मोतीहारी से अमरजीत सिंह*
*बचपन बचाओ अभियान: कक्षा 1 से 5 तक के विद्यालयों में पॉक्सो एक्ट जागरूकता पर जोर दूसरे दिन जिले के प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को किया गया संबोधित, बच्चों की सुरक्षा एवं अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर बल
मोतिहारी, पूर्वी चंपारण। बचपन बचाओ अभियान के तहत विद्यालयों में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन जिले के कक्षा एक से पांच तक के विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को संबोधित किया गया। महात्मा गांधी प्रेक्षागृह, मोतिहारी में आयोजित कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पूर्वी चंपारण के सचिव न्यायाधीश नितिन कुमार त्रिपाठी ने बच्चों को यौन शोषण एवं उत्पीड़न से बचाने और उनके अधिकारों की जानकारी देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को अपनी सुरक्षा, व्यक्तिगत सीमाओं तथा सुरक्षित और असुरक्षित व्यवहार की जानकारी होनी चाहिए। बच्चों को यह विश्वास दिलाना जरूरी है कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार की स्थिति में वे बिना डर अपने अभिभावक, शिक्षक या किसी विश्वसनीय व्यक्ति को इसकी जानकारी दे सकते हैं।
कार्यक्रम में बताया गया कि अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्रत्येक विद्यालय से एक पुरुष शिक्षक एवं एक महिला शिक्षिका को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षित शिक्षक-शिक्षिकाएं विद्यालयों में नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों को उनकी उम्र के अनुरूप पॉक्सो एक्ट, बाल सुरक्षा और अधिकारों की जानकारी देंगे। इसके लिए नुक्कड़ नाटक, निबंध प्रतियोगिता, वाद-विवाद तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों का सहारा लिया जाएगा।
डर और चुप्पी नहीं, जागरूकता से होगी बच्चों की सुरक्षा
कार्यक्रम में बच्चों को किसी भी अनुचित व्यवहार के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करने तथा उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुनने की आवश्यकता पर बल दिया गया। अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की गई कि वे बच्चों के साथ विश्वासपूर्ण संबंध बनाएं, उनकी बात संवेदनशीलता से सुनें और किसी घटना की जानकारी मिलने पर उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कानून के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
पॉक्सो एक्ट, 2012 अठारह वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण प्रदान करने वाला कानून है। विद्यालयों में सरल भाषा और व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को इसके प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि वे असुरक्षित परिस्थितियों को पहचान सकें और जरूरत पड़ने पर सहायता मांग सकें।
कार्यक्रम में जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन गिरी, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी माध्यमिक उमेश कुमार, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मोतिहारी अफरोज आलम तथा शिक्षा विभाग से रेयाज अहमद, शकील अहमद और अमरेश कुमार समेत अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं प्रशिक्षक उपस्थित रहे।
संदेश: बच्चों की सुरक्षा केवल कानून की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विद्यालय, परिवार और समाज का साझा दायित्व है। जागरूकता, संवेदनशीलता और समय पर उचित कार्रवाई से ही सुरक्षित बचपन एवं बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।
रिपोर्ट;अमरजीत सिंह
