झांसी। माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण झांसी श्रीमती कमलेश कच्छल के निर्देशानुसार शुक्रवार को न्यायिक अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने जनपद स्थित अनाथ आश्रम, वृद्धाश्रम एवं शेल्टर होम (आश्रय गृह) का औचक व सघन मासिक निरीक्षण किया। निरीक्षण टीम ने आवासियों से आत्मीय संवाद कर उनका हाल जाना और प्रबंधन को व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की सख्त हिदायत दी।
निरीक्षण दल में मुख्य रूप से माननीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री देवाशीष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव/सिविल जज (सी.डि.) श्री मुन्ना लाल तथा किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट श्रीमती अंकिता बौद्ध शामिल रहे।
वृद्धजनों से किया आत्मीय संवाद, स्वास्थ्य व सुविधाओं का लिया जायजा निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने वृद्धाश्रम पहुंचकर वहाँ निवासरत वरिष्ठ नागरिकों से उनके स्वास्थ्य, खान-पान, रहने की व्यवस्था तथा नियमित चिकित्सीय जांच के संबंध में जानकारी ली। प्रभारी सचिव श्री मुन्ना लाल ने आश्रम प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि वृद्धजनों की देखरेख में कोई ढिलाई न बरती जाए। उन्होंने शासन द्वारा दी जाने वाली पेंशन, स्वास्थ्य व विधिक सहायता योजनाओं का लाभ प्रत्येक वृद्धजन तक पारदर्शी रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए।
शिक्षा, पोषण और सुरक्षा मानकों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश इसके उपरांत टीम ने अनाथ आश्रम एवं शेल्टर होम का मुआयना किया। अधिकारियों ने बच्चों व संवासियों के शयन कक्षों, भोजनालय, शुद्ध पेयजल, स्वच्छता एवं प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं का सूक्ष्मता से जायजा लिया। किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट श्रीमती अंकिता बौद्ध ने बच्चों की शिक्षा, मानसिक विकास, पोषण व सुरक्षा मानकों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को ‘किशोर न्याय अधिनियम’ का कड़ाई से पालन करने को कहा।
रजिस्टरों के रख-रखाव और निःशुल्क विधिक सहायता पर जोर अपर जिला जज श्री देवाशीष ने संस्थान में साफ-सफाई, पौष्टिक आहार तथा अद्यतन फर्स्ट-एड किट की उपलब्धता हर समय सुनिश्चित रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवासियों के आगमन, प्रस्थान एवं स्वास्थ्य से संबंधित रजिस्टरों का विधिवत रख-रखाव किया जाए। साथ ही निर्देशित किया कि यदि किसी भी आवासी को कानूनी सहायता की आवश्यकता हो, तो तत्काल जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को सूचित करें ताकि उन्हें समय पर निःशुल्क विधिक सहायता एवं परामर्श उपलब्ध कराया जा सके।
निरीक्षण के दौरान संबंधित संस्थानों के अधीक्षक, प्रशासनिक कर्मचारी एवं विधिक टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
