जोधपुर।
‘सन सिटी’ और ‘ब्लू सिटी’ के नाम से विश्व विख्यात जोधपुर के भीतरी शहर की ऐतिहासिक पहचान को पुनर्जीवित करने के लिए अब स्थानीय युवाओं और रहवासियों ने खुद मोर्चा संभाल लिया है। शहर की प्राचीन चूने और नील की संस्कृति व परंपरा को सहेजने के लिए लोग स्वेच्छा से आगे आकर अपने मकानों को पारंपरिक नीले रंग (ब्लू) में रंगवा रहे हैं।
इस हेरिटेज संरक्षण की मुहिम में युवा साथी रवि पुरोहित, सूरज व्यास और विवेक बोड़ा ,रमेश जी पुरोहित,कालू भा,भुवनेश व्यास,मोनिका व्यास (पार्षद)विकास रागवानी(पार्षद),संजय जी दईया (पार्षद )समेत कई अन्य युवा प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं। ये युवा किसी सरकारी मदद का इंतजार किए बिना, अपनी जेब से पैसे लगाकर भीतरी शहर के मकानों को नीले रंग से रंगवा रहे हैं ताकि जोधपुर की यह अनूठी पहचान कायम रहे।
प्रशासन से ‘स्पेशल फंड’ जारी करने की अपील
इस अभियान से जुड़े दीपक सोनी ने बताया कि जोधपुर के भीतरी शहर, विशेषकर नवचौकिया’ इलाके की नीली छटा देखने के लिए दुनिया भर से लाखों पर्यटक हर साल यहां आते हैं। इस धरोहर को और अधिक समृद्ध व जिंदा रखने के लिए उन्होंने प्रशासन से एक ‘स्पेशल फंड’ जारी करने का निवेदन किया है।
धरोहर संरक्षण के साथ मिलेगा रोजगार
दीपक सोनी ने प्रशासन को सुझाव देते हुए कहा कि इस विशेष फंड का उपयोग भीतरी शहर के सरकारी मंदिरों, अस्पतालों और उन आम नागरिकों के मकानों को रंगवाने में किया जाना चाहिए जो स्वेच्छा से अपने घर को चूने और नील से ब्लू कराना चाहते हैं। इस पहल से जहां एक ओर स्थानीय लोगों और कारीगरों को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर जोधपुर वासी अपनी वैश्विक धरोहर को बचाने में अहम भूमिका निभा सकेंगे।
आनंद शर्मा की रिपोर्ट जोधपुर राजस्थान से
