डिंडोरी/जबलपुर, मध्यप्रदेश।
IRRI परियोजना, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर (मध्यप्रदेश) ने कृषकों को जानकारी देते हुए बताया कि धान की फसल पककर तैयार होने के बाद समय पर कटाई करना तथा आगामी फसल के लिए गुणवत्तायुक्त बीजों का संरक्षण करना अत्यंत आवश्यक है। कटाई में देरी होने से दानों के झड़ने, बालियाँ टूटने और प्रतिकूल मौसम के कारण फसल को नुकसान हो सकता है। वहीं, बीजों का उचित तरीके से सुखाना एवं भंडारण उनकी गुणवत्ता और अंकुरण क्षमता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
धान की कटाई के संबंध में किसानों को सलाह दी जाती है कि वे फसल की परिपक्वता का नियमित निरीक्षण करें। सामान्यतः जब लगभग 80–85 प्रतिशत बालियाँ सुनहरे पीले रंग की हो जाएँ, तब कटाई की तैयारी करनी चाहिए। हालाँकि, कटाई का उचित समय धान की किस्म और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। समय पर कटाई करने से दानों के नुकसान को कम करने में सहायता मिलती है।
कटाई के बाद मड़ाई का कार्य स्वच्छ स्थान पर करना चाहिए। मड़ाई के उपरांत धान की सफाई करके उसे अच्छी तरह सुखाना आवश्यक है। बीज के रूप में सुरक्षित रखे जाने वाले धान में नमी की मात्रा सामान्यतः 12 प्रतिशत या उससे कम रखना उपयुक्त होता है। बीजों को अधिक तापमान पर सुखाने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उनकी अंकुरण क्षमता प्रभावित हो सकती है।
बीज संरक्षण के लिए स्वस्थ एवं शुद्ध बीजों का चयन करना चाहिए। टूटे, रोगग्रस्त और अन्य किस्मों के दानों को अलग कर देना चाहिए। इसके बाद बीजों को साफ एवं सूखे पात्रों में भरकर नमी, कीटों और फफूँद से सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए। भंडारण के दौरान बीज की स्थिति की समय-समय पर जाँच करना भी जरूरी है। अगली बुवाई से पहले अंकुरण क्षमता का परीक्षण करने से बेहतर पौध संख्या प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
धान की खेती में गुणवत्तायुक्त बीजों का विशेष महत्व है। वैज्ञानिक विधियों से बीजों का संरक्षण करने पर उनकी गुणवत्ता बनाए रखने तथा आगामी फसल की बेहतर शुरुआत करने में मदद मिलती है। किसानों को कटाई, मड़ाई, सुखाने और भंडारण के प्रत्येक चरण में कृषि वैज्ञानिकों की सलाह एवं अनुशंसित तकनीकों का पालन करना चाहिए।
यह जानकारी IRRI परियोजना, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर, मध्यप्रदेश से संबंधित अनुसंधान गतिविधियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। धान की फसल में वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना बेहतर उत्पादन, संसाधनों के उचित उपयोग और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पृथ्वी झारिया की रिपोर्ट
रिपोर्ट जिला डिंडोरी मध्यप्रदेश
