- रामजी तिवारी मड़ावरा ललितपुर
1 नवम्बर 1956 को बुन्देलखण्ड राज्य का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया था – टीटू कपूर
आजादी के बाद करीब आठ वर्ष सात माह तक अस्तित्व में रहा था बुन्देलखण्ड राज्य
ललितपुर। आज 1 नवम्बर को स्थानीय कंपनी बाग में बु. वि. सेना के केन्द्रीय प्रमुख हरीश कपूर टीटू की अध्यक्षता में बुन्देलखण्ड विकास सेना ने काला दिवस मनाया और सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अब प्रत्येक वर्ष 1 नवम्बर को बु. वि. सेना काला दिवस मनायेगी । इस अवसर पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता सेना के केन्द्रीय प्रमुख हरीश कपूर टीटू ने की। उपस्थित कार्यकर्ताओं ने पृथक बुन्देलखण्ड राज्य के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए केन्द्र सरकार से अलग राज्य के गठन की मांग उठाई।
इस अवसर पर हरीश कपूर टीटू ने कहा कि देश की आजादी के बाद 12 मार्च 1948 को 34 रियासतों को मिलाकर बुन्देलखण्ड राज्य का गठन किया गया था, जिसकी राजधानी नौगांव निर्धारित की गई थी। यह राज्य लगभग आठ वर्ष सात माह तक अस्तित्व में रहा। लेकिन 1 नवम्बर 1956 को राज्य पुनर्गठन के बाद बुन्देलखण्ड की ऐतिहासिक पहचान और अलग राज्य का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया। बुन्देलखण्ड के विभिन्न हिस्सों को उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में शामिल कर दिया गया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में बुन्देलखण्ड विकास सेना अब प्रतिवर्ष 1 नवम्बर को काला दिवस मनायेगी ।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच फैला बुन्देलखण्ड क्षेत्र दशकों से सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहा है। बेरोजगारी, अशिक्षा, बदहाल स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल संकट, जर्जर सड़कें, बिजली की समस्या और उद्योगों के अभाव ने यहां के विकास को अवरुद्ध कर रखा है। सूखा और अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाएं क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रही हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि विभिन्न सरकारों द्वारा समय-समय पर आश्वासन दिए जाने के बावजूद पृथक बुन्देलखण्ड राज्य के गठन की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई है, जबकि चुनाव के समय इस मांग को उचित ठहराया जाता रहा है।
टीटू कपूर ने कहा कि बुन्देलखण्ड के समुचित विकास, रोजगार के अवसरों के सृजन और क्षेत्र की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए पृथक राज्य का गठन आवश्यक है। बुन्देलखण्ड विकास सेना आने वाले समय में राज्य निर्माण के आंदोलन को और तेज करेगी। इसके लिए पूरे बुन्देलखण्ड क्षेत्र में जनसंपर्क और जनजागरण अभियान चलाकर आम जनता को आंदोलन से जोड़ा जाएगा।
उन्होंने देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री तथा उ. प्र. तथा म. प्र. के मुख्यमंत्रियों से मांग की है कि बुन्देलखण्डवासियों के स्वाभिमान और गरिमा को ध्यान में रखते हुए पृथक बुंदेलखंड राज्य का निर्माण करें।
बैठक में राजकुमार कुशवाहा, अमर सिंह बुन्देला, कदीर खां, रामप्रकाश झा, रामस्वरूप राजपूत, काशीराम विश्वकर्मा, अमित जैन, गफूर खां, हरगोविंद, खेमचंद कुशवाहा, सुरेश झा, बलराम चौहान, कामता प्रसाद भट्ट, जगत सिंह, राकेश विश्वकर्मा, कोमल कुशवाहा, जालम वंशकार, अमित, आशीष सिंह एवं राज सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
