10 हजार से अधिक लोगों ने निकाली रैली, आठवीं अनुसूची में शामिल करने और ओडिशा की दूसरी राजभाषा का दर्जा देने की मांग
बाँगीरिपोसी, 7 नवंबर 2026: मुंडारी भाषा के अधिकार, अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए शुरू हुआ मुंडारी भाषा उलगुलान अब एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। मुंडारी भाषा समन्वय समिति के आह्वान पर शनिवार को बाँगीरिपोसी प्रखंड में आयोजित विशाल जनसभा ने इस आंदोलन को नई दिशा और शक्ति प्रदान की। मुंडारी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने तथा ओडिशा की दूसरी राजभाषा का दर्जा देने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में मुंडारी भाषी लोगों ने आंदोलन में भाग लिया।
मुंडारी भाषा समन्वय समिति मुंडारी भाषी समाज के भाषाई अधिकारों, सांस्कृतिक पहचान और आने वाली पीढ़ियों के स्वाभिमान की रक्षा के उद्देश्य से गठित एक सामूहिक मंच है। मुंडा समाज के 17 सामाजिक संगठनों के सहयोग एवं समन्वय से गठित यह समिति मुंडारी भाषा आंदोलन को गांव से प्रखंड, प्रखंड से जिला तथा जिला से राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
प्रखंड स्तरीय जनसभाओं, रैलियों, सरकारी अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने तथा गांव-गांव में जनजागरूकता अभियान के माध्यम से समिति इस मांग को एक संगठित जनआंदोलन का रूप दे रही है। आंदोलन की दो प्रमुख मांगें हैं—मुंडारी भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना और ओडिशा की दूसरी राजभाषा के रूप में मान्यता प्रदान करना।
इन्हीं मांगों को लेकर बाँगीरिपोसी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) के माध्यम से ओडिशा के मुख्यमंत्री, भारत के प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय गृह मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
मुंडारी भाषा भारत की प्राचीन आदिवासी भाषाओं में से एक है। यह केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि मुंडा समाज के इतिहास, पारंपरिक ज्ञान, लोकसंस्कृति, प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध और पीढ़ियों से संचित सामूहिक स्मृतियों की जीवंत धरोहर है। इसलिए इस भाषा का संरक्षण, संवर्धन और संवैधानिक मान्यता केवल एक भाषा का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे समाज की पहचान और स्वाभिमान से जुड़ा प्रश्न है।
भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष और बलिदान आदिवासी अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान का अमर प्रतीक है। भारत सरकार द्वारा उनकी जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाना आदिवासी इतिहास और योगदान के महत्व को दर्शाता है। वहीं संविधान सभा में आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए बुलंद आवाज उठाने वाले मारांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा का योगदान भी इस समाज के गौरवशाली इतिहास का अभिन्न हिस्सा है।
जनगणना 2011 के आंकड़ों में मुंडारी एवं मुंडा मातृभाषा से संबंधित विभिन्न जानकारियां दर्ज हैं। हालांकि मुंडारी भाषी लोगों की वास्तविक संख्या का स्पष्ट आकलन करने के लिए सटीक आंकड़ों और सरकारी सूचनाओं में पारदर्शिता की आवश्यकता है। प्राचीन इतिहास, समृद्ध संस्कृति और व्यापक भाषाई समुदाय होने के बावजूद मुंडारी भाषा को अब तक संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान नहीं मिल पाया है। इसे लेकर भाषाई समुदाय में असंतोष बढ़ रहा है और मान्यता की मांग को लेकर आंदोलन लगातार मजबूत हो रहा है।
शनिवार को बाँगीरिपोसी बंगला चौक से प्रखंड कार्यालय तक एक विशाल रैली निकाली गई। आयोजकों के अनुसार, बाँगीरिपोसी प्रखंड की 19 ग्राम पंचायतों से आए लगभग 10 हजार से अधिक पुरुषों और महिलाओं ने इसमें भाग लिया।
भीषण गर्मी के बावजूद आंदोलनकारियों के उत्साह और मनोबल में कोई कमी नहीं दिखाई दी। मुंडारी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के संकल्प के साथ लोगों की एकजुटता और समर्पण ने पूरे आंदोलन को विशेष पहचान प्रदान की।
पारंपरिक वेशभूषा में सजे पुरुषों और महिलाओं ने अनुशासित तरीके से दो कतारों में पदयात्रा की। मुंडा समाज के पारंपरिक वाद्ययंत्रों, नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने रैली को आकर्षक बनाने के साथ-साथ आंदोलन की सांस्कृतिक पहचान को भी प्रदर्शित किया।
इस जनआंदोलन में मुंडारी शिक्षा परिषद के सचिव बुधिया सिंह, मुंडारी भाषा समन्वय समिति के पर्यवेक्षक रामेश्वर सिंह, सारसकणा प्रखंड संयोजक करमचांद सिंह, मोरड़ा प्रखंड संयोजक देवेंद्र नाथ सिंह, बड़साही प्रखंड संयोजक बैद्यनाथ सिंह, गुंडिहुड़ी पंचायत संयोजक उमेश चंद्र सिंह, सेवानिवृत्त सैनिक जगन्नाथ सिंह, श्यामाखुंटा प्रखंड के 49 नंबर जोन के जिला परिषद सदस्य मधुसूदन सिंह, बाँगीरिपोसी प्रखंड के उपाध्यक्ष रतिकांत सिंह, बाँगीरिपोसी ग्राम पंचायत की सरपंच सुनीमणि सिंह तथा मुंडा स्वशासन गुटुगाम के अध्यक्ष मनोरंजन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी और भाषा प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल संचालन में मुंडारी भाषा समन्वय समिति के बाँगीरिपोसी प्रखंड संयोजक जगन्नाथ सिंह, उपाध्यक्ष सुलोचना सिंह, सचिव नागेश्वर सिंह, सहसचिव संजू सिंह और कोषाध्यक्ष लक्ष्मी सिंह सहित विभिन्न मुंडारी भाषा विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा सहयोगी संगठनों के पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
बाँगीरिपोसी में आयोजित यह विशाल जनसमागम केवल एक प्रखंड स्तरीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि मुंडारी भाषा के अधिकार और सम्मान के लिए उभरती व्यापक जनचेतना का प्रतीक है। गांव से गांव और प्रखंड से प्रखंड तक आंदोलन का विस्तार, विभिन्न संगठनों का सक्रिय सहयोग तथा भाषाई समुदाय की अभूतपूर्व एकजुटता इस आंदोलन की बढ़ती ताकत को दर्शाती है।
मयूरभंज से हिमांशु शेखर प्रहराज, स्टेट हेड।
