अलवर शहर के सरकारी नाले अब बिल्डरों की निजी संपत्ति है।
रिपोर्टर सुरेन्द्र सिंह बडेर अलवर (इंडियन टीवी न्यूज़)
अलवर शहर में सरकारी नलों पर कब्जा बिल्डिंग में लेंटर तो बाद में डाल लेंगे नालू पर लेंटर डाला।
अलवर शहर अब सभी मामलों में सर्वगुण संपन्न हो गया है यहां अब किसी चीज की कमी नहीं है गंदगी, अपराध, चोरी चकारी और अतिक्रमण तो पहले से ही अपने चरम स्तर पर था। मगर अब नालों पर अतिक्रमण भी आम बात हो गई है जिसके पास जब में पैसा है वह अपने घर का लेंटर तो बाद में डालता है वह अपने घर के बाहर बने सरकारी नाले पर लेंटर पहले डाल देता है जैसे सरकारी नाला उसकी निजी संपत्ति हो।
आप इस तस्वीर को देखिए यह तस्वीर कर्मचारी कॉलोनी के सामने और तिजारा फाटक की पुलिया से पहले बन रहे एक भवन की है। जहां भवन मालिक ने भवन बनाने से पहले ही भवन के सामने बने सरकारी नाले पर पटाओ (लेंटर )डाल दिया है जबकि यह नाला अलवर के उन महत्वपूर्ण नालों में से एक है जहां से अलवर शहर का सारा कचरा बहकर अलवर से बाहर की ओर जाता है।
कुछ दिन पहले अखबार में छपी एक खबर के बाद इस नाले पर पहले डाले गए पटाओ को भवन मालिक के द्वारा हटा लिया गया था। लेकिन बाद में ऐसा क्या हुआ भगवान जाने की भवन मालिक ने इस बार पहले से भी मोटा और मजबूत लेंटर नाले पर फिर से डाल दिया है।
अलवर शहर बरसात के दिनों में जल भराव की वजह से एक टापू बन जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अलवर के लगभग 90% नाले कचरे से भरे पड़े हैं। लेकिन कचरा इसलिए साफ नहीं हो सकता है क्योंकि उन पर रसूखदारों ने अपने लेंटर डाल लिए हैं और खास बात यह है कि सरकारी नलों पर से अतिक्रमण हटाने का दाम अलवर नगर निगम में अब नहीं बचा है। तो अलवर शहर जिसे वर्तमान में अलवर की जनता अनाथ शहर कहना ज्यादा पसंद करती है।