मिलावट का कारोबार समाज में नासूर बन कर उभर रहा,जिम्मेदार कौन बनाने वाले, व्यापारी या संबंधित विभाग..?
खमियाजा जनता को ही भुगतना पड़ता..!!
देश में आज त्यौहारों का मौषम चल रहा हैं और आगे दीपावली जैसा बड़ा त्यौहार भी हैं लेकिन हर साल की तरह मिलावट करने वाले अपनी पौबारह करने पर उतारू हैं उन्हें मतलब नही कि उनके मिलावटी सामान के कारण कितने लोगों को उनकी दी हुई बीमारी से जानमाल को नुकसान होगा!सच्चाई यही हैं कि मिलावट का कारोबार समाज में नासूर बन कर उभरा है, मिलावटी आहार से बीमारियां बढ़ी हैं!पूरी तरह स्वस्थ कोई नहीं दिखता,आलम यह है कि ज्यादातर परिवारों में कोई न कोई सदस्य ऐसा होता है जो किसी न किसी बीमारी से जूझ रहा होता है,यह बहुत कुछ हमारी जीवन शैली और व्यवस्था पर निर्भर करता है,व्यक्ति का विवेक-शून्य व्यवहार समस्या की जड़ है। हम इसे भली-भांति समझते हैं पर स्वीकार करने से बचते हैं!’सब चलता है’ और एक दिन मरना तो सभी को है, फिर क्यों न, खा-पीकर मरे! ऐसी भावना से आगे बढ़ते जाते हैं!तकनीकी सुलभता ने बाजार के मायने बदल दिए हैं! विभिन्न तरीकों से जबरदस्ती मांग पैदा की जा रही है प्रतिस्पर्धा, कुछ नया करने और लीक से हट कर करने के फेर में ऊल-जलूल व्यंजनों की भरमार तमाम बड़े-छोटे शहरों में देखने को मिलती है। व्यापारी सिर्फ मुनाफे पर चलता है, सेहत की चिंता किसी को नहीं! व्यवस्था के लिए सरकार जिम्मेदार होती है जो नीतियां बना कर कार्यों का संचालन करती है, मगर भ्रष्टाचार के कारण आंखें मूंद लेती है। आखिर में खमियाजा जनता ही भुगतती है। रिपोर्ट रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़