पिछली महाराजा अग्रसेन जयंती पर अग्रवाल समन्वय समिति पर पदाधिकारियो ओर समिति के पीछे खड़े समिति के आकाओ के मध्य खींची तलवारों की चमक अभी भी बरकरार, म्यान से बाहर आयी तलवारे भीतर जाने को तैयार नही, समिति में बड़े उलटफेर की संभावना?: सूत्र
सहारनपुर: अग्रवाल समन्वय समिति का गठन कई वर्षों के पश्चात पिछले चुनावों के दृष्टिगत किये जाने के बाद वैश्य समाज मे जहां जागरूकता आनी चाहिए थी वही समिति के एक पदाधिकारी ने मात्र अपनी महत्वकांशा की पूर्ति के लिए पूरे वैश्य समाज की भावनाओ को हाशिये पर डाल दिया, यही नही जयंती के कार्यक्रम के दौरान केवल अपने कुछ चापलूसों को वरीयता देने और चंदा उगाही कर जयंती के कार्ड पर नाम छापने की राजनीति ने वैश्य समाज की भावनाओ से जबरदस्त खिलवाड़ किया, यही नही पिछले वर्ष समवय समिति के तत्वाधान में निकाली गई जयंती पर जिस प्रकार से वैश्य समाज के वरिष्ठ ओर सभ्रांत व्यक्तियों को दर किनार किया गया उससे समाज मे एक अलग ही सन्देश गया, परन्तु समिति के नाम पर रोटियां सेकने में इस एक पदाधिकारी ने कोई कोर कसर नही छोड़ी, आलम यह रहा कि जयंती के कार्यक्रम में मात्र मातृशक्ति ही नज़र आई जबकि वैश्य समाज वरिष्ठ ओर गणमान्य लोग नदारद थे, इस पदाधिकारी ने समिति के संरक्षक तक को नज़रंदाज़ कर डाला, अब आलम यह है कि फ़ोटो खिंचवाने वाले इस पदाधिकारी को लेकर सकल वैश्य समाज में विरोध के स्वर मुखर है, वही दो बार से हुई जयंती के हिसाब को लेकर भी चर्चाएं आम है, सूत्रों द्वारा मिली जानकारी के अनुसार इस बार किसी ऐसे व्यक्ति को समिति की जिम्मेदारी दी जा सकती है जो कर्मठ होगा और कम से कम चंदे के मामले में लिप्त न हो तथा समाज के वरिष्ठ जनों का सम्मान करता हो। सूत्रों द्वारा लगातार जानकारी मिल रही है कि यह एक पदाधिकारी लगातार फिर से एक बार समिति में आने के लिए बेताब है परन्तु अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इस बार इसका आना संभव नही प्रतीत होता, वैसे भी इस पदाधिकारी की सुबह सुबह नेताओ की परिक्रमा करने और उनके साथ फ़ोटो खिंचवा कर सोशल मीडिया की सुर्खी बनने की ख्वाहिश को लेकर भी प्रश्नचिन्ह लगने प्रारम्भ हो गए है, वैश्य समाज के प्रबुद्ध जनों का स्पष्ट मत है कि ऐसा पदाधिकारी नही बनाया जाना चाहिए जो लालची ओर समाज के हित मे न हो, अब देखना होगा कि क्या इसको बाहर का दरवाजा दिखाया जाता है या फिर चापलूसी की लकड़ी पकड़ कर यह सन्गठन में दोबारा आना चाहता है बहरहाल मामला गड़बड़ है क्योंकि यदि यह आता है तो निश्चय ही समाज मे विद्रोह की स्तिथि पैदा होने की संभावना है। वही जयंती के चन्दे का हिसाब भी इस बार का प्रमुख मुद्दा होगा।
आलोक अग्रवाल
खबर वैश्य समाज के सूत्रों के आधार पर रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़