संवाददात जगमाल सिंह प्रजापति नीमराना इंडिया टीवी न्यूज़
खैरथल तिजारा जिले में खंडित मूर्ति को गंगा,जमुना नदी पानी में विसर्जित किया जाएगा उचित प्राणप्रतिष्ठा अनुष्ठान के बाद, दुर्गा माता की नई मूर्ति को पूजनीय माना जाएगा और भक्त उनकी पूजा और आराधना कर सकेंगे दुर्गा माता मंदिर में मूर्ति खंडित होने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। हिंदू धर्म में ऐसी घटनाओं को अशुभ माना जाता है और खंडित मूर्ति को घर या मंदिर से हटाकर विधि-विधान से विसर्जित करने की परंपरा है। खंडित मूर्ति की पूजा करना गलत माना जाता है और इससे नकारात्मक ऊर्जा घर या मंदिर में आ सकती है ऐसा माना जाता है *दुर्गा माता मंदिर में मूर्ती खंडित होने का कारण* मई 1991में मन्दिर की स्थापना हुई थीं समय के साथ मॉडल भी बदलता है कुछ महीने पहले मन्दिर में टाइल और रंग पेंट कार्य हुआ था।बताया।गया टाइल पत्थर लगाते समय अन जाने मे मूर्ति को स्थान से हटाया गया ।प्राणप्रतिष्ठा एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें देवी की मूर्ति को जीवंत और पूजनीय बनाया जाता है। प्राणप्रतिष्ठा एक संस्कार है जिसमें मूर्ति में प्राणों की स्थापना की जाती है, जिससे वह देवता का रूप ले लेती है और पूजन के योग्य हो जाती है।
– संवाददात जगमाल सिंह प्रजापति नीमराना इंडिया टीवी न्यूज़