जनता जनप्रतिनिधियों को सदन में सिर्फ इसलिए भेजती है के जब जनहित का कोई मामला हो तो विधायक या सांसद अधिकारियों से काम करा सके या अगर अधिकारी जनहित के काम ना करे तो सख्ताई से जनहित के काम करा सके
अगर सदन में बैठे हुए लोग सिर्फ दर्शकों की भूमिका निभाएंगे तो जनता की आवाज़ आख़िर उठाएगा कौन
में विधायक या सांसद तो नहीं हूँ लेकिन उस दिन सरकारी हॉस्पिटल की बदतर हालात होने पर रात्रि 11 बजे ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी से जो भी मदद करा सकता था कराने के मैंने प्रयास किया और अगर में किसी ना किसी सदन में होता तो ऐसे अधिकारियों को दंडित कराने का भी काम ज़रूर करता
रोहित सिंह राणा भावी प्रत्याशी बेहट विधानसभा
रमेश सैनी सहारनपुर इंडियन टीवी न्यूज़