संवाददाता राजा गोखले ब्यूरो चीफ खरगोन जिला से
महेश्वर-बड़वाह के बीच फंसा पेंचः मालवा-निमाड़ का ‘स्वर्ग’ देवगढ़; सिर्फ 3.5 किमी की सड़क ने रोकी विकास की राह, खड़ी चढ़ाई बनी बाधा
यहां न कभी पोस्टमैन आया, न एम्बुलेंस, गांव में ही हो रही 10 में से 9 डिलीवरी
इंदौर-खरगोन सीमा पर बसा खूबसूरत देवगढ़ गांव आजादी के 78 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा है। वजह सिर्फ इतनी सी है कि 3.5 किमी ऊंची पहाड़ी पर बसे इस गांव तक पहुंचने के लिए आज तक कोई भी सरकार सड़क तक नहीं बना सकी है। इस कारण सरकारी योजनाएं भी यहां तक पहुंचने से पहले ही हांफने लगती हैं। नेता भी यहां सिर्फ वोट के लिए चढ़ाई करते हैं। यहां न कभी पोस्टमैन आया, न 108 एंबुलेंस, डायल 100 जैसी सुविधाओं का लाभ मिला। यहां न कभी पोस्टमैन आया, न एम्बुलेंस, गांव में ही हो रही 10 में से 9 डिलीवरी
इंदौर-खरगोन सीमा पर बसा खूबसूरत देवगढ़ गांव आजादी के 78 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा है। वजह सिर्फ इतनी सी है कि 3.5 किमी ऊंची पहाड़ी पर बसे इस गांव तक पहुंचने के लिए आज तक कोई भी सरकार सड़क तक नहीं बना सकी है। इस कारण सरकारी योजनाएं भी यहां तक पहुंचने से पहले ही हांफने लगती हैं। नेता भी यहां सिर्फ वोट के लिए चढ़ाई करते हैं। यहां न कभी पोस्टमैन आया, न 108 एंबुलेंस, डायल 100 जैसी सुविधाओं का लाभ मिला।
यही कारण है कि 2018 में ग्रामीणों ने विरोध करते हुए एक भी वोट नहीं डाला था। देवगढ़ महेश्वर विधानसभा में आता है, पर जनपद पंचायत बड़वाह है। यह गांव इंदौर संभागीय कार्यालय से 70 किमी दूर है और बड़की चौकी ग्राम पंचायत का हिस्सा है। सरपंच प्रतिनिधि छन्नूलाल खड़ा ने बताया कि सड़क को लेकर दो बार सर्वे हो चुका है लेकिन आज तक निर्माण नहीं हुआ।
आंगनवाड़ी में कार्यकर्ता और स्कूल से शिक्षक नदारद करीब साढ़े तीन किमी की खड़ी चढ़ाई में कई जोखिम भरे मोड़ हैं। यहां आठवीं तक का ही स्कूल है। ग्रामीणों ने बताया, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अनीता वर्मा महीने में एक-दो बार आती हैं। कक्षाओं में बच्चे थे पर शिक्षक नहीं। बच्चों ने बताया कि अतिथि शिक्षक दो-तीन दिन में आते हैं। मुख्य शिक्षक को तो आज तक किसी ने नहीं देखा।
680 जनसंख्या
355 वोटर
60 से अधिक कुटीर स्वीकृत, एक भी नहीं बनी 3.5 किमी का घाट सेक्शन
6.5 किमी का कच्चा रास्ता मुख्य मार्ग से
मतदान के लिए निर्वाचन से जुड़ी टीम को ट्रैक्टर से गांव तक पहुंचाया जाता है।
सरकारी योजनाओं की ऐसी स्थिति
पीएम आवास योजना में 60 से अधिक मकान स्वीकृत, एक भी पूर्ण नहीं।
बिजली जाए तो महीनेभर तक नहीं आती।
माध्यमिक शिक्षा के बाद यहां पढ़ाई संभव नहीं।
शिक्षक कई दिनों में आते हैं स्कूल।
सरकारी राशन के लिए दूसरे गांव जाते हैं।