नरेश सोनी
हजारीबाग: झारखंड सरकार ने बाल श्रम और तस्करी जैसी गंभीर समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में मंगलवार को हजारीबाग में उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल स्तरीय एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य ‘बाल श्रम उन्मूलन राज्य कार्ययोजना 2025-2030’ को और अधिक प्रभावी बनाना था।
इस कार्यशाला में प्रमंडल के सात जिलों से 90 से अधिक अधिकारियों, बाल अधिकार विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग और महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और बाल कल्याण संघ के सहयोग से किया गया था।
चुनौतियों और व्यावहारिक समाधानों पर गहन चर्चा
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने बाल श्रम से जुड़े कई पहलुओं पर गहन चर्चा की। कोडरमा के डीएसपी, कीर्ति भान सिंह, ने बचाव अभियानों में आने वाली चुनौतियों को साझा करते हुए कहा, “पुलिस को बचाव के समय कस्टोडियन और मालिक दोनों से विरोध का सामना करना पड़ता है। सबसे बड़ी चुनौती बचाव के बाद बच्चों के सुरक्षित पुनर्वास की है, जिसके लिए स्पष्ट दिशानिर्देश जरूरी हैं।” उन्होंने बताया कि यह कार्यशाला इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बाल कल्याण संघ के सचिव, संजय कुमार मिश्रा, ने जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों की चुनौतियों को स्वीकार करते हुए कहा कि हमें सही जानकारी और दृष्टिकोण की जरूरत है ताकि बचाए गए बच्चों को सम्मान के साथ समाज में फिर से बसाया जा सके। माता-पिता को भी रोजगार देने का सुझाव कार्यशाला में सबसे महत्वपूर्ण सुझावों में से एक यह था कि बच्चों को बचाने के बाद न केवल उनका, बल्कि उनके माता-पिता को भी रोजगार दिया जाए, ताकि गरीबी के कारण वे दोबारा बच्चों को बाल श्रम या तस्करी के जाल में न धकेलें। शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों ने यह भी बताया कि कई बार माता-पिता अपनी बच्चियों को स्कूल से वापस बुला लेते हैं, जो बालिका शिक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है।
फोकस्ड ग्रुप डिस्कशन में सभी जिलों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर, जमीनी हकीकत पर आधारित व्यावहारिक समाधानों को लागू किया जाए। उन्होंने ग्लैमर लाइफ के आकर्षण के प्रति बच्चों को जागरूक करने और ग्राम स्तर से लेकर राज्य स्तर तक निगरानी तंत्र को मजबूत करने की भी बात कही।अंत में, यह निष्कर्ष निकाला गया कि बाल श्रम को खत्म करना सिर्फ एक प्रशासनिक कार्य नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन है, जिसमें सरकार के साथ-साथ समाज और समुदाय की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।