कुशीनगर मेडिकल कॉलेज परिसर में एक पोस्टर लगते ही चर्चा का विषय बन गया। पोस्टर में दलालों पर अंकुश लगाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही गई थी। दिलचस्प यह रहा कि पोस्टर लगने के कुछ ही देर बाद उसे हटा भी दिया गया।
इस अचानक हुई कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वास्तव में किसी “बड़े दबाव” के चलते पोस्टर हटाया गया? या फिर अंदरखाने किसी “मैनेजमेंट” का खेल हुआ? चूँकि कॉलेज परिसर में लंबे समय से दलालों की सक्रियता को लेकर मरीज और उनके परिजन आवाज उठाते रहे हैं, इसलिए यह घटना और भी अहम मानी जा रही है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि दलालों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात आते ही कुछ प्रभावशाली लोग सक्रिय हो जाते हैं और कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश करते हैं। वहीं कॉलेज प्रशासन का पक्ष अब तक साफ तौर पर सामने नहीं आया है।
फिलहाल, यह घटना सवालों के घेरे में है —
अगर दलालों पर अंकुश लगाने का संकल्प था तो पोस्टर क्यों हटाया गया?
क्या यह केवल दिखावे की कार्रवाई थी?
या फिर वाकई किसी दबाव में प्रशासन पीछे हटा?
अब सबकी निगाहें कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर हैं कि वे इस मामले पर आधिकारिक तौर पर क्या बयान देते हैं।
👉 यह खबर न सिर्फ मरीजों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ी है बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त दलाल तंत्र पर भी सीधा सवाल खड़ा करती है।