बड़ी सफलता: भाकपा माओवादी का पूर्व जोनल कमांडर सुनील गंझू हजारीबाग से गिरफ्तार; लेवी वसूलने आया था
हजारीबाग संवाददाता । झारखंड पुलिस को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता मिली है। हजारीबाग जिले में छापामारी अभियान के दौरान भाकपा माओवादी (CPI-Maoist) के सक्रिय सदस्य और पूर्व जोनल कमांडर सुनील गंझू (पिता-स्व. चमन गंझू, सिमरातरी, चतरा) को गिरफ्तार किया गया है।
हजारीबाग पुलिस अधीक्षक कार्यालय द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, सोमवार (13 अक्टूबर 2025) को गुप्त सूचना मिली थी कि माओवादी का उत्तरी छोटानागपुर का रीजनल कमांडर शहदेव महतो और सब-जोनल कमांडर नताशा अपने 4-5 सदस्यों के साथ बड़कागांव थाना क्षेत्र के जोराकाट गांव में भ्रमणशील हैं और लेवी (जबरन वसूली) लेने आने वाले हैं।
घेराबंदी कर पकड़ा गया कुख्यात नक्सली
सूचना के सत्यापन और कार्रवाई के लिए सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) अमित आनंद (भा.पु.से.) के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया, जिसने त्वरित कार्रवाई करते हुए ग्राम जोराकाट में घेराबंदी शुरू की। पुलिस बल को देखकर 4-5 संदिग्ध व्यक्ति भागने लगे। पुलिस की घेराबंदी में एक व्यक्ति, जिसके हाथ में झोला था, पकड़ा गया, जबकि अन्य जंगल-झाड़ी का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे।
पूछताछ के दौरान पकड़े गए व्यक्ति ने अपनी पहचान पूर्व जोनल कमांडर सुनील गंझू के रूप में बताई। तलाशी लेने पर उसके झोले से लाल रंग की स्याही से लिखा “उत्तरी छोटानागपुर जोनल कमिटी भाकपा (माओवादी)” अंकित नक्सली लेटर पैड और पर्चा बरामद हुआ।
कड़ाई से पूछताछ में सुनील गंझू ने स्वीकार किया कि वे वर्तमान में 4-5 की संख्या में संगठन में साथ चलते हैं और
हजारीबाग-चतरा जिले में कोल कंपनियों, ठेकेदारों और कोयला व्यापारियों से संगठन के विस्तार के लिए लेवी वसूलते हैं। वह आज भी इसी उद्देश्य से जोराकाट आया था।
40 से अधिक मामलों में था वांछित
पुलिस के अनुसार, कुख्यात नक्सली सुनील गंझू का आपराधिक इतिहास काफी पुराना और लंबा है।
सुनील गंझू वर्ष 1990 में भाकपा माओवादी संगठन में शामिल हुआ था।
वर्ष 1993 में कटकमसांडी थाना क्षेत्र के डांटो गांव में पुलिस मुठभेड़ में उसे पैर में गोली लगी थी और वह गिरफ्तार हुआ था।
1998 में जेल से निकलने के बाद वह फिर संगठन में शामिल हो गया और हजारीबाग के केरेडारी थाना क्षेत्र अंतर्गत बेलतु में माओवादियों द्वारा किए गए नरसंहार की घटना में मुख्य आरोपी था।
2004 में पुलिस ने उसे केरेडारी थाना से फिर गिरफ्तार कर जेल भेजा।
कुल 42 मामलों में वह सजायाफ्ता कैदी था। 2018 में सजा खत्म होने के बाद जेल से बाहर आते ही वह फिर से नक्सली संगठन में सक्रिय हो गया।
जेल से निकलने के बाद उसने चतरा जिले के मयूरहंड थाना क्षेत्र के पुन्दरी गांव में नागेश्वर यादव की हत्या कर दी थी।
वर्तमान में वह रीजनल कमांडर शहदेव महतो और नताशा की टीम में रहकर हजारीबाग में सक्रिय था और हाल ही में उसके विरुद्ध 12 और नए मामले दर्ज किए गए थे।
छापामारी दल
इस सफल अभियान में सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अमित आनंद (भा.पु.से.), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बड़कागांव पवन कुमार, बड़कागांव अंचल निरीक्षक ललित कुमार, बड़कागांव थाना प्रभारी कृष्णा कुमार, डांडी ओ.पी. प्रभारी सागेन मुर्मू, तकनीकी शाखा हजारीबाग और थाना सशस्त्र बल शामिल थे।